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Suhel-Saifur

Suhel-Saifur
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Kadir 1 / 5
1
हमने (इस कुरान) को शबे क़द्र में नाज़िल (करना शुरू) किया
Suhel-Saifur 97:1
2
और तुमको क्या मालूम शबे क़द्र क्या है
Suhel-Saifur 97:2
3
शबे क़द्र (मरतबा और अमल में) हज़ार महीनो से बेहतर है
Suhel-Saifur 97:3
4
इस (रात) में फ़रिश्ते और जिबरील (साल भर की) हर बात का हुक्म लेकर अपने परवरदिगार के हुक्म से नाज़िल होते हैं
Suhel-Saifur 97:4
5
ये रात सुबह के तुलूअ होने तक (अज़सरतापा) सलामती है
Suhel-Saifur 97:5
Kadir suresi tamamlandı