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Suhel-Saifur

Suhel-Saifur
Suhel-Saifur meali ile okumaya başla
Alak 1 / 19
1
(ऐ रसूल) अपने परवरदिगार का नाम लेकर पढ़ो जिसने हर (चीज़ को) पैदा किया
Suhel-Saifur 96:1
2
उस ने इन्सान को जमे हुए ख़ून से पैदा किया पढ़ो
Suhel-Saifur 96:2
3
और तुम्हारा परवरदिगार बड़ा क़रीम है
Suhel-Saifur 96:3
4
जिसने क़लम के ज़रिए तालीम दी
Suhel-Saifur 96:4
5
उसीने इन्सान को वह बातें बतायीं जिनको वह कुछ जानता ही न था
Suhel-Saifur 96:5
6
सुन रखो बेशक इन्सान जो अपने को ग़नी देखता है
Suhel-Saifur 96:6
7
तो सरकश हो जाता है
Suhel-Saifur 96:7
8
बेशक तुम्हारे परवरदिगार की तरफ (सबको) पलटना है
Suhel-Saifur 96:8
9
भला तुमने उस शख़्श को भी देखा
Suhel-Saifur 96:9
10
जो एक बन्दे को जब वह नमाज़ पढ़ता है तो वह रोकता है
Suhel-Saifur 96:10
11
भला देखो तो कि अगर ये राहे रास्त पर हो या परहेज़गारी का हुक्म करे
Suhel-Saifur 96:11
12
(तो रोकना कैसा)
Suhel-Saifur 96:12
13
भला देखो तो कि अगर उसने (सच्चे को) झुठला दिया और (उसने) मुँह फेरा
Suhel-Saifur 96:13
14
(तो नतीजा क्या होगा) क्या उसको ये मालूम नहीं कि ख़ुदा यक़ीनन देख रहा है
Suhel-Saifur 96:14
15
देखो अगर वह बाज़ न आएगा तो हम परेशानी के पट्टे पकड़ के घसीटेंगे
Suhel-Saifur 96:15
16
झूठे ख़तावार की पेशानी के पट्टे
Suhel-Saifur 96:16
17
तो वह अपने याराने जलसा को बुलाए हम भी जल्लाद फ़रिश्ते को बुलाएँगे
Suhel-Saifur 96:17
18
(ऐ रसूल) देखो हरगिज़ उनका कहना न मानना
Suhel-Saifur 96:18
19
और सजदे करते रहो और कुर्ब हासिल करो (19) (सजदा)
Suhel-Saifur 96:19
Alak suresi tamamlandı