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Suhel-Saifur

Suhel-Saifur
Suhel-Saifur meali ile okumaya başla
Tin 1 / 8
1
इन्जीर और ज़ैतून की क़सम
Suhel-Saifur 95:1
2
और तूर सीनीन की
Suhel-Saifur 95:2
3
और उस अमन वाले शहर (मक्का) की
Suhel-Saifur 95:3
4
कि हमने इन्सान बहुत अच्छे कैड़े का पैदा किया
Suhel-Saifur 95:4
5
फिर हमने उसे (बूढ़ा करके रफ्ता रफ्ता) पस्त से पस्त हालत की तरफ फेर दिया
Suhel-Saifur 95:5
6
मगर जो लोग ईमान लाए और अच्छे (अच्छे) काम करते रहे उनके लिए तो बे इन्तेहा अज्र व सवाब है
Suhel-Saifur 95:6
7
तो (ऐ रसूल) इन दलीलों के बाद तुमको (रोज़े) जज़ा के बारे में कौन झुठला सकता है
Suhel-Saifur 95:7
8
क्या ख़ुदा सबसे बड़ा हाकिम नहीं है (हाँ ज़रूर है)
Suhel-Saifur 95:8
Tin suresi tamamlandı