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Suhel-Saifur

Suhel-Saifur
Suhel-Saifur meali ile okumaya başla
Beled 1 / 20
1
मुझे इस शहर (मक्का) की कसम
Suhel-Saifur 90:1
2
और तुम इसी शहर में तो रहते हो
Suhel-Saifur 90:2
3
और (तुम्हारे) बाप (आदम) और उसकी औलाद की क़सम
Suhel-Saifur 90:3
4
हमने इन्सान को मशक्क़त में (रहने वाला) पैदा किया है
Suhel-Saifur 90:4
5
क्या वह ये समझता है कि उस पर कोई काबू न पा सकेगा
Suhel-Saifur 90:5
6
वह कहता है कि मैने अलग़ारों माल उड़ा दिया
Suhel-Saifur 90:6
7
क्या वह ये ख्याल रखता है कि उसको किसी ने देखा ही नहीं
Suhel-Saifur 90:7
8
क्या हमने उसे दोनों ऑंखें और ज़बान
Suhel-Saifur 90:8
9
और दोनों लब नहीं दिए (ज़रूर दिए)
Suhel-Saifur 90:9
10
और उसको (अच्छी बुरी) दोनों राहें भी दिखा दीं
Suhel-Saifur 90:10
11
फिर वह घाटी पर से होकर (क्यों) नहीं गुज़रा
Suhel-Saifur 90:11
12
और तुमको क्या मालूम कि घाटी क्या है
Suhel-Saifur 90:12
13
किसी (की) गर्दन का (गुलामी या कर्ज से) छुड़ाना
Suhel-Saifur 90:13
14
या भूख के दिन रिश्तेदार यतीम या ख़ाकसार
Suhel-Saifur 90:14
15
मोहताज को
Suhel-Saifur 90:15
16
खाना खिलाना
Suhel-Saifur 90:16
17
फिर तो उन लोगों में (शामिल) हो जाता जो ईमान लाए और सब्र की नसीहत और तरस खाने की वसीयत करते रहे
Suhel-Saifur 90:17
18
यही लोग ख़ुश नसीब हैं
Suhel-Saifur 90:18
19
और जिन लोगों ने हमारी आयतों से इन्कार किया है यही लोग बदबख्त हैं
Suhel-Saifur 90:19
20
कि उनको आग में डाल कर हर तरफ से बन्द कर दिया जाएगा
Suhel-Saifur 90:20
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