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Suhel-Saifur

Suhel-Saifur
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İnşikak 1 / 25
1
जब आसमान फट जाएगा
Suhel-Saifur 84:1
2
और अपने परवरदिगार का हुक्म बजा लाएगा और उसे वाजिब भी यही है
Suhel-Saifur 84:2
3
और जब ज़मीन (बराबर करके) तान दी जाएगी
Suhel-Saifur 84:3
4
और जो कुछ उसमें है उगल देगी और बिल्कुल ख़ाली हो जाएगी
Suhel-Saifur 84:4
5
और अपने परवरदिगार का हुक्म बजा लाएगी
Suhel-Saifur 84:5
6
और उस पर लाज़िम भी यही है (तो क़यामत आ जाएगी) ऐ इन्सान तू अपने परवरदिगार की हुज़ूरी की कोशिश करता है
Suhel-Saifur 84:6
7
तो तू (एक न एक दिन) उसके सामने हाज़िर होगा फिर (उस दिन) जिसका नामाए आमाल उसके दाहिने हाथ में दिया जाएगा
Suhel-Saifur 84:7
8
उससे तो हिसाब आसान तरीके से लिया जाएगा
Suhel-Saifur 84:8
9
और (फिर) वह अपने (मोमिनीन के) क़बीले की तरफ ख़ुश ख़ुश पलटेगा
Suhel-Saifur 84:9
10
लेकिन जिस शख़्श को उसका नामए आमल उसकी पीठ के पीछे से दिया जाएगा
Suhel-Saifur 84:10
11
वह तो मौत की दुआ करेगा
Suhel-Saifur 84:11
12
और जहन्नुम वासिल होगा
Suhel-Saifur 84:12
13
ये शख़्श तो अपने लड़के बालों में मस्त रहता था
Suhel-Saifur 84:13
14
और समझता था कि कभी (ख़ुदा की तरफ) फिर कर जाएगा ही नहीं
Suhel-Saifur 84:14
15
हाँ उसका परवरदिगार यक़ीनी उसको देख भाल कर रहा है
Suhel-Saifur 84:15
16
तो मुझे शाम की मुर्ख़ी की क़सम
Suhel-Saifur 84:16
17
और रात की और उन चीज़ों की जिन्हें ये ढाँक लेती है
Suhel-Saifur 84:17
18
और चाँद की जब पूरा हो जाए
Suhel-Saifur 84:18
19
कि तुम लोग ज़रूर एक सख्ती के बाद दूसरी सख्ती में फँसोगे
Suhel-Saifur 84:19
20
तो उन लोगों को क्या हो गया है कि ईमान नहीं ईमान नहीं लाते
Suhel-Saifur 84:20
21
और जब उनके सामने क़ुरान पढ़ा जाता है तो (ख़ुदा का) सजदा नहीं करते (21) (सजदा)
Suhel-Saifur 84:21
22
बल्कि काफ़िर लोग तो (और उसे) झुठलाते हैं
Suhel-Saifur 84:22
23
और जो बातें ये लोग अपने दिलों में छिपाते हैं ख़ुदा उसे ख़ूब जानता है
Suhel-Saifur 84:23
24
तो (ऐ रसूल) उन्हें दर्दनाक अज़ाब की ख़ुशख़बरी दे दो
Suhel-Saifur 84:24
25
मगर जो लोग ईमान लाए और उन्होंने अच्छे अच्छे काम किए उनके लिए बेइन्तिहा अज्र (व सवाब है)
Suhel-Saifur 84:25
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