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Suhel-Saifur

Suhel-Saifur
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1
जब आसमान तर्ख़ जाएगा
Suhel-Saifur 82:1
2
और जब तारे झड़ पड़ेंगे
Suhel-Saifur 82:2
3
और जब दरिया बह (कर एक दूसरे से मिल) जाएँगे
Suhel-Saifur 82:3
4
और जब कब्रें उखाड़ दी जाएँगी
Suhel-Saifur 82:4
5
तब हर शख़्श को मालूम हो जाएगा कि उसने आगे क्या भेजा था और पीछे क्या छोड़ा था
Suhel-Saifur 82:5
6
ऐ इन्सान तुम्हें अपने परवरदिगार के बारे में किस चीज़ ने धोका दिया
Suhel-Saifur 82:6
7
जिसने तुझे पैदा किया तो तुझे दुरूस्त बनाया और मुनासिब आज़ा दिए
Suhel-Saifur 82:7
8
और जिस सूरत में उसने चाहा तेरे जोड़ बन्द मिलाए
Suhel-Saifur 82:8
9
हाँ बात ये है कि तुम लोग जज़ा (के दिन) को झुठलाते हो
Suhel-Saifur 82:9
10
हालॉकि तुम पर निगेहबान मुक़र्रर हैं
Suhel-Saifur 82:10
11
बुर्ज़ुग लोग (फरिश्ते सब बातों को) लिखने वाले (केरामन क़ातेबीन)
Suhel-Saifur 82:11
12
जो कुछ तुम करते हो वह सब जानते हैं
Suhel-Saifur 82:12
13
बेशक नेको कार (बेहिश्त की) नेअमतों में होंगे
Suhel-Saifur 82:13
14
और बदकार लोग यक़ीनन जहन्नुम में जज़ा के दिन
Suhel-Saifur 82:14
15
उसी में झोंके जाएँगे
Suhel-Saifur 82:15
16
और वह लोग उससे छुप न सकेंगे
Suhel-Saifur 82:16
17
और तुम्हें क्या मालूम कि जज़ा का दिन क्या है
Suhel-Saifur 82:17
18
फिर तुम्हें क्या मालूम कि जज़ा का दिन क्या चीज़ है
Suhel-Saifur 82:18
19
उस दिन कोई शख़्श किसी शख़्श की भलाई न कर सकेगा और उस दिन हुक्म सिर्फ ख़ुदा ही का होगा
Suhel-Saifur 82:19
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