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Suhel-Saifur

Suhel-Saifur
Suhel-Saifur meali ile okumaya başla
Abese 1 / 42
1
वह अपनी बात पर चीं ब जबीं हो गया
Suhel-Saifur 80:1
2
और मुँह फेर बैठा कि उसके पास नाबीना आ गया
Suhel-Saifur 80:2
3
और तुमको क्या मालूम यायद वह (तालीम से) पाकीज़गी हासिल करता
Suhel-Saifur 80:3
4
या वह नसीहत सुनता तो नसीहत उसके काम आती
Suhel-Saifur 80:4
5
तो जो कुछ परवाह नहीं करता
Suhel-Saifur 80:5
6
उसके तो तुम दरपै हो जाते हो हालॉकि अगर वह न सुधरे
Suhel-Saifur 80:6
7
तो तुम ज़िम्मेदार नहीं
Suhel-Saifur 80:7
8
और जो तुम्हारे पास लपकता हुआ आता है
Suhel-Saifur 80:8
9
और (ख़ुदा से) डरता है
Suhel-Saifur 80:9
10
तो तुम उससे बेरूख़ी करते हो
Suhel-Saifur 80:10
11
देखो ये (क़ुरान) तो सरासर नसीहत है
Suhel-Saifur 80:11
12
तो जो चाहे इसे याद रखे
Suhel-Saifur 80:12
13
(लौहे महफूज़ के) बहुत मोअज़ज़िज औराक़ में (लिखा हुआ) है
Suhel-Saifur 80:13
14
बुलन्द मरतबा और पाक हैं
Suhel-Saifur 80:14
15
(ऐसे) लिखने वालों के हाथों में है
Suhel-Saifur 80:15
16
जो बुज़ुर्ग नेकोकार हैं
Suhel-Saifur 80:16
17
इन्सान हलाक हो जाए वह क्या कैसा नाशुक्रा है
Suhel-Saifur 80:17
18
(ख़ुदा ने) उसे किस चीज़ से पैदा किया
Suhel-Saifur 80:18
19
नुत्फे से उसे पैदा किया फिर उसका अन्दाज़ा मुक़र्रर किया
Suhel-Saifur 80:19
20
फिर उसका रास्ता आसान कर दिया
Suhel-Saifur 80:20
21
फिर उसे मौत दी फिर उसे कब्र में दफ़न कराया
Suhel-Saifur 80:21
22
फिर जब चाहेगा उठा खड़ा करेगा
Suhel-Saifur 80:22
23
सच तो यह है कि ख़ुदा ने जो हुक्म उसे दिया उसने उसको पूरा न किया
Suhel-Saifur 80:23
24
तो इन्सान को अपने घाटे ही तरफ ग़ौर करना चाहिए
Suhel-Saifur 80:24
25
कि हम ही ने (बादल) से पानी बरसाया
Suhel-Saifur 80:25
26
फिर हम ही ने ज़मीन (दरख्त उगाकर) चीरी फाड़ी
Suhel-Saifur 80:26
27
फिर हमने उसमें अनाज उगाया
Suhel-Saifur 80:27
28
और अंगूर और तरकारियाँ
Suhel-Saifur 80:28
29
और ज़ैतून और खजूरें
Suhel-Saifur 80:29
30
और घने घने बाग़ और मेवे
Suhel-Saifur 80:30