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Suhel-Saifur

Suhel-Saifur
Suhel-Saifur meali ile okumaya başla
Naziat 1 / 46
1
उन (फ़रिश्तों) की क़सम
Suhel-Saifur 79:1
2
जो (कुफ्फ़ार की रूह) डूब कर सख्ती से खींच लेते हैं
Suhel-Saifur 79:2
3
और उनकी क़सम जो (मोमिनीन की जान) आसानी से खोल देते हैं
Suhel-Saifur 79:3
4
और उनकी क़सम जो (आसमान ज़मीन के दरमियान) पैरते फिरते हैं
Suhel-Saifur 79:4
5
फिर एक के आगे बढ़ते हैं
Suhel-Saifur 79:5
6
फिर (दुनिया के) इन्तज़ाम करते हैं (उनकी क़सम) कि क़यामत हो कर रहेगी
Suhel-Saifur 79:6
7
जिस दिन ज़मीन को भूचाल आएगा फिर उसके पीछे और ज़लज़ला आएगा
Suhel-Saifur 79:7
8
उस दिन दिलों को धड़कन होगी
Suhel-Saifur 79:8
9
उनकी ऑंखें (निदामत से) झुकी हुई होंगी
Suhel-Saifur 79:9
10
कुफ्फ़ार कहते हैं कि क्या हम उलटे पाँव (ज़िन्दगी की तरफ़) फिर लौटेंगे
Suhel-Saifur 79:10
11
क्या जब हम खोखल हड्डियाँ हो जाएँगे
Suhel-Saifur 79:11
12
कहते हैं कि ये लौटना तो बड़ा नुक़सान देह है
Suhel-Saifur 79:12
13
वह (क़यामत) तो (गोया) बस एक सख्त चीख़ होगी
Suhel-Saifur 79:13
14
और लोग शक़ बारगी एक मैदान (हश्र) में मौजूद होंगे
Suhel-Saifur 79:14
15
(ऐ रसूल) क्या तुम्हारे पास मूसा का किस्सा भी पहुँचा है
Suhel-Saifur 79:15
16
जब उनको परवरदिगार ने तूवा के मैदान में पुकारा
Suhel-Saifur 79:16
17
कि फिरऔन के पास जाओ वह सरकश हो गया है
Suhel-Saifur 79:17
18
(और उससे) कहो कि क्या तेरी ख्वाहिश है कि (कुफ्र से) पाक हो जाए
Suhel-Saifur 79:18
19
और मैं तुझे तेरे परवरदिगार की राह बता दूँ तो तुझको ख़ौफ (पैदा) हो
Suhel-Saifur 79:19
20
ग़रज़ मूसा ने उसे (असा का बड़ा) मौजिज़ा दिखाया
Suhel-Saifur 79:20
21
तो उसने झुठला दिया और न माना
Suhel-Saifur 79:21
22
फिर पीठ फेर कर (ख़िलाफ़ की) तदबीर करने लगा
Suhel-Saifur 79:22
23
फिर (लोगों को) जमा किया और बुलन्द आवाज़ से चिल्लाया
Suhel-Saifur 79:23
24
तो कहने लगा मैं तुम लोगों का सबसे बड़ा परवरदिगार हूँ
Suhel-Saifur 79:24
25
तो ख़ुदा ने उसे दुनिया और आख़ेरत (दोनों) के अज़ाब में गिरफ्तार किया
Suhel-Saifur 79:25
26
बेशक जो शख़्श (ख़ुदा से) डरे उसके लिए इस (किस्से) में इबरत है
Suhel-Saifur 79:26
27
भला तुम्हारा पैदा करना ज्यादा मुश्किल है या आसमान का
Suhel-Saifur 79:27
28
कि उसी ने उसको बनाया उसकी छत को ख़ूब ऊँचा रखा
Suhel-Saifur 79:28
29
फिर उसे दुरूस्त किया और उसकी रात को तारीक बनाया और (दिन को) उसकी धूप निकाली
Suhel-Saifur 79:29
30
और उसके बाद ज़मीन को फैलाया
Suhel-Saifur 79:30