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Suhel-Saifur

Suhel-Saifur
Suhel-Saifur meali ile okumaya başla
Nebe 1 / 40
1
ये लोग आपस में किस चीज़ का हाल पूछते हैं
Suhel-Saifur 78:1
2
एक बड़ी ख़बर का हाल
Suhel-Saifur 78:2
3
जिसमें लोग एख्तेलाफ कर रहे हैं
Suhel-Saifur 78:3
4
देखो उन्हें अनक़रीब ही मालूम हो जाएगा
Suhel-Saifur 78:4
5
फिर इन्हें अनक़रीब ही ज़रूर मालूम हो जाएगा
Suhel-Saifur 78:5
6
क्या हमने ज़मीन को बिछौना
Suhel-Saifur 78:6
7
और पहाड़ों को (ज़मीन) की मेख़े नहीं बनाया
Suhel-Saifur 78:7
8
और हमने तुम लोगों को जोड़ा जोड़ा पैदा किया
Suhel-Saifur 78:8
9
और तुम्हारी नींद को आराम (का बाइस) क़रार दिया
Suhel-Saifur 78:9
10
और रात को परदा बनाया
Suhel-Saifur 78:10
11
और हम ही ने दिन को (कसब) मआश (का वक्त) बनाया
Suhel-Saifur 78:11
12
और तुम्हारे ऊपर सात मज़बूत (आसमान) बनाए
Suhel-Saifur 78:12
13
और हम ही ने (सूरज) को रौशन चिराग़ बनाया
Suhel-Saifur 78:13
14
और हम ही ने बादलों से मूसलाधार पानी बरसाया
Suhel-Saifur 78:14
15
ताकि उसके ज़रिए से दाने और सबज़ी
Suhel-Saifur 78:15
16
और घने घने बाग़ पैदा करें
Suhel-Saifur 78:16
17
बेशक फैसले का दिन मुक़र्रर है
Suhel-Saifur 78:17
18
जिस दिन सूर फूँका जाएगा और तुम लोग गिरोह गिरोह हाज़िर होगे
Suhel-Saifur 78:18
19
और आसमान खोल दिए जाएँगे
Suhel-Saifur 78:19
20
तो (उसमें) दरवाज़े हो जाएँगे और पहाड़ (अपनी जगह से) चलाए जाएँगे तो रेत होकर रह जाएँगे
Suhel-Saifur 78:20
21
बेशक जहन्नुम घात में है
Suhel-Saifur 78:21
22
सरकशों का (वही) ठिकाना है
Suhel-Saifur 78:22
23
उसमें मुद्दतों पड़े झींकते रहेंगें
Suhel-Saifur 78:23
24
न वहाँ ठन्डक का मज़ा चखेंगे और न खौलते हुए पानी
Suhel-Saifur 78:24
25
और बहती हुई पीप के सिवा कुछ पीने को मिलेगा
Suhel-Saifur 78:25
26
(ये उनकी कारस्तानियों का) पूरा पूरा बदला है
Suhel-Saifur 78:26
27
बेशक ये लोग आख़ेरत के हिसाब की उम्मीद ही न रखते थे
Suhel-Saifur 78:27
28
और इन लोगो हमारी आयतों को बुरी तरह झुठलाया
Suhel-Saifur 78:28
29
और हमने हर चीज़ को लिख कर मनज़बत कर रखा है
Suhel-Saifur 78:29
30
तो अब तुम मज़ा चखो हमतो तुम पर अज़ाब ही बढ़ाते जाएँगे
Suhel-Saifur 78:30