Ana SayfaMealler › Suhel-Saifur
SS

Suhel-Saifur

Suhel-Saifur
Suhel-Saifur meali ile okumaya başla
Mürselat 1 / 50
1
हवाओं की क़सम जो (पहले) धीमी चलती हैं
Suhel-Saifur 77:1
2
फिर ज़ोर पकड़ के ऑंधी हो जाती हैं
Suhel-Saifur 77:2
3
और (बादलों को) उभार कर फैला देती हैं
Suhel-Saifur 77:3
4
फिर (उनको) फाड़ कर जुदा कर देती हैं
Suhel-Saifur 77:4
5
फिर फरिश्तों की क़सम जो वही लाते हैं
Suhel-Saifur 77:5
6
ताकि हुज्जत तमाम हो और डरा दिया जाए
Suhel-Saifur 77:6
7
कि जिस बात का तुमसे वायदा किया जाता है वह ज़रूर होकर रहेगा
Suhel-Saifur 77:7
8
फिर जब तारों की चमक जाती रहेगी
Suhel-Saifur 77:8
9
और जब आसमान फट जाएगा
Suhel-Saifur 77:9
10
और जब पहाड़ (रूई की तरह) उड़े उड़े फिरेंगे
Suhel-Saifur 77:10
11
और जब पैग़म्बर लोग एक मुअय्यन वक्त पर जमा किए जाएँगे
Suhel-Saifur 77:11
12
(फिर) भला इन (बातों) में किस दिन के लिए ताख़ीर की गयी है
Suhel-Saifur 77:12
13
फ़ैसले के दिन के लिए
Suhel-Saifur 77:13
14
और तुमको क्या मालूम की फ़ैसले का दिन क्या है
Suhel-Saifur 77:14
15
उस दिन झुठलाने वालों की मिट्टी ख़राब है
Suhel-Saifur 77:15
16
क्या हमने अगलों को हलाक नहीं किया
Suhel-Saifur 77:16
17
फिर उनके पीछे पीछे पिछलों को भी चलता करेंगे
Suhel-Saifur 77:17
18
हम गुनेहगारों के साथ ऐसा ही किया करते हैं
Suhel-Saifur 77:18
19
उस दिन झुठलाने वालों की मिट्टी ख़राब है
Suhel-Saifur 77:19
20
क्या हमने तुमको ज़लील पानी (मनी) से पैदा नहीं किया
Suhel-Saifur 77:20
21
फिर हमने उसको एक मुअय्यन वक्त तक
Suhel-Saifur 77:21
22
एक महफूज़ मक़ाम (रहम) में रखा
Suhel-Saifur 77:22
23
फिर (उसका) एक अन्दाज़ा मुक़र्रर किया तो हम कैसा अच्छा अन्दाज़ा मुक़र्रर करने वाले हैं
Suhel-Saifur 77:23
24
उन दिन झुठलाने वालों की ख़राबी है
Suhel-Saifur 77:24
25
क्या हमने ज़मीन को ज़िन्दों और मुर्दों को समेटने वाली नहीं बनाया
Suhel-Saifur 77:25
26
और उसमें ऊँचे ऊँचे अटल पहाड़ रख दिए
Suhel-Saifur 77:26
27
और तुम लोगों को मीठा पानी पिलाया
Suhel-Saifur 77:27
28
उस दिन झुठलाने वालों की ख़राबी है
Suhel-Saifur 77:28
29
जिस चीज़ को तुम झुठलाया करते थे अब उसकी तरफ़ चलो
Suhel-Saifur 77:29
30
(धुएँ के) साये की तरफ़ चलो जिसके तीन हिस्से हैं
Suhel-Saifur 77:30