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Suhel-Saifur

Suhel-Saifur
Suhel-Saifur meali ile okumaya başla
Müddessir 1 / 56
1
ऐ (मेरे) कपड़ा ओढ़ने वाले (रसूल) उठो
Suhel-Saifur 74:1
2
और लोगों को (अज़ाब से) डराओ
Suhel-Saifur 74:2
3
और अपने परवरदिगार की बड़ाई करो
Suhel-Saifur 74:3
4
और अपने कपड़े पाक रखो
Suhel-Saifur 74:4
5
और गन्दगी से अलग रहो
Suhel-Saifur 74:5
6
और इसी तरह एहसान न करो कि ज्यादा के ख़ास्तगार बनो
Suhel-Saifur 74:6
7
और अपने परवरदिगार के लिए सब्र करो
Suhel-Saifur 74:7
8
फिर जब सूर फूँका जाएगा
Suhel-Saifur 74:8
9
तो वह दिन काफ़िरों पर सख्त दिन होगा
Suhel-Saifur 74:9
10
आसान नहीं होगा
Suhel-Saifur 74:10
11
(ऐ रसूल) मुझे और उस शख़्श को छोड़ दो जिसे मैने अकेला पैदा किया
Suhel-Saifur 74:11
12
और उसे बहुत सा माल दिया
Suhel-Saifur 74:12
13
और नज़र के सामने रहने वाले बेटे (दिए)
Suhel-Saifur 74:13
14
और उसे हर तरह के सामान से वुसअत दी
Suhel-Saifur 74:14
15
फिर उस पर भी वह तमाअ रखता है कि मैं और बढ़ाऊँ
Suhel-Saifur 74:15
16
ये हरगिज़ न होगा ये तो मेरी आयतों का दुश्मन था
Suhel-Saifur 74:16
17
तो मैं अनक़रीब उस सख्त अज़ाब में मुब्तिला करूँगा
Suhel-Saifur 74:17
18
उसने फिक्र की और ये तजवीज़ की
Suhel-Saifur 74:18
19
तो ये (कम्बख्त) मार डाला जाए
Suhel-Saifur 74:19
20
उसने क्यों कर तजवीज़ की
Suhel-Saifur 74:20
21
फिर ग़ौर किया
Suhel-Saifur 74:21
22
फिर त्योरी चढ़ाई और मुँह बना लिया
Suhel-Saifur 74:22
23
फिर पीठ फेर कर चला गया और अकड़ बैठा
Suhel-Saifur 74:23
24
फिर कहने लगा ये बस जादू है जो (अगलों से) चला आता है
Suhel-Saifur 74:24
25
ये तो बस आदमी का कलाम है
Suhel-Saifur 74:25
26
(ख़ुदा का नहीं) मैं उसे अनक़रीब जहन्नुम में झोंक दूँगा
Suhel-Saifur 74:26
27
और तुम क्या जानों कि जहन्नुम क्या है
Suhel-Saifur 74:27
28
वह न बाक़ी रखेगी न छोड़ देगी
Suhel-Saifur 74:28
29
और बदन को जला कर सियाह कर देगी
Suhel-Saifur 74:29
30
उस पर उन्नीस (फ़रिश्ते मुअय्यन) हैं
Suhel-Saifur 74:30