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Suhel-Saifur

Suhel-Saifur
Suhel-Saifur meali ile okumaya başla
Nuh 1 / 28
1
हमने नूह को उसकी क़ौम के पास (पैग़म्बर बनाकर) भेजा कि क़ब्ल उसके कि उनकी क़ौम पर दर्दनाक अज़ाब आए उनको उससे डराओ
Suhel-Saifur 71:1
2
तो नूह (अपनी क़ौम से) कहने लगे ऐ मेरी क़ौम मैं तो तुम्हें साफ़ साफ़ डराता (और समझाता) हूँ
Suhel-Saifur 71:2
3
कि तुम लोग ख़ुदा की इबादत करो और उसी से डरो और मेरी इताअत करो
Suhel-Saifur 71:3
4
ख़ुदा तुम्हारे गुनाह बख्श देगा और तुम्हें (मौत के) मुक़र्रर वक्त तक बाक़ी रखेगा, बेशक जब ख़ुदा का मुक़र्रर किया हुआ वक्त अा जाता है तो पीछे हटाया नहीं जा सकता अगर तुम समझते होते
Suhel-Saifur 71:4
5
(जब लोगों ने न माना तो) अर्ज़ की परवरदिगार मैं अपनी क़ौम को (ईमान की तरफ) बुलाता रहा
Suhel-Saifur 71:5
6
लेकिन वह मेरे बुलाने से और ज्यादा गुरेज़ ही करते रहे
Suhel-Saifur 71:6
7
और मैने जब उनको बुलाया कि (ये तौबा करें और) तू उन्हें माफ कर दे तो उन्होने अपने कानों में उंगलियां दे लीं और मुझसे छिपने को कपड़े ओढ़ लिए और अड़ गए और बहुत शिद्दत से अकड़ बैठे
Suhel-Saifur 71:7
8
फिर मैंने उनको बिल एलान बुलाया फिर उनको ज़ाहिर ब ज़ाहिर समझाया
Suhel-Saifur 71:8
9
और उनकी पोशीदा भी फ़हमाईश की कि मैंने उनसे कहा
Suhel-Saifur 71:9
10
अपने परवरदिगार से मग़फेरत की दुआ माँगो बेशक वह बड़ा बख्शने वाला है
Suhel-Saifur 71:10
11
(और) तुम पर आसमान से मूसलाधार पानी बरसाएगा
Suhel-Saifur 71:11
12
और माल और औलाद में तरक्क़ी देगा, और तुम्हारे लिए बाग़ बनाएगा, और तुम्हारे लिए नहरें जारी करेगा
Suhel-Saifur 71:12
13
तुम्हें क्या हो गया है कि तुम ख़ुदा की अज़मत का ज़रा भी ख्याल नहीं करते
Suhel-Saifur 71:13
14
हालॉकि उसी ने तुमको तरह तरह का पैदा किया
Suhel-Saifur 71:14
15
क्या तुमने ग़ौर नहीं किया कि ख़ुदा ने सात आसमान ऊपर तलें क्यों कर बनाए
Suhel-Saifur 71:15
16
और उसी ने उसमें चाँद को नूर बनाया और सूरज को रौशन चिराग़ बना दिया
Suhel-Saifur 71:16
17
और ख़ुदा ही तुमको ज़मीन से पैदा किया
Suhel-Saifur 71:17
18
फिर तुमको उसी में दोबारा ले जाएगा और (क़यामत में उसी से) निकाल कर खड़ा करेगा
Suhel-Saifur 71:18
19
और ख़ुदा ही ने ज़मीन को तुम्हारे लिए फ़र्श बनाया
Suhel-Saifur 71:19
20
ताकि तुम उसके बड़े बड़े कुशादा रास्तों में चलो फिरो
Suhel-Saifur 71:20
21
(फिर) नूह ने अर्ज़ की परवरदिगार इन लोगों ने मेरी नाफ़रमानी की उस शख़्श के ताबेदार बन के जिसने उनके माल और औलाद में नुक़सान के सिवा फ़ायदा न पहुँचाया
Suhel-Saifur 71:21
22
और उन्होंने (मेरे साथ) बड़ी मक्कारियाँ की
Suhel-Saifur 71:22
23
और (उलटे) कहने लगे कि आपने माबूदों को हरगिज़ न छोड़ना और न वद को और सुआ को और न यगूस और यऊक़ व नस्र को छोड़ना
Suhel-Saifur 71:23
24
और उन्होंने बहुतेरों को गुमराह कर छोड़ा और तू (उन) ज़ालिमों की गुमराही को और बढ़ा दे
Suhel-Saifur 71:24
25
(आख़िर) वह अपने गुनाहों की बदौलत (पहले तो) डुबाए गए फिर जहन्नुम में झोंके गए तो उन लोगों ने ख़ुदा के सिवा किसी को अपना मददगार न पाया
Suhel-Saifur 71:25
26
और नूह ने अर्ज़ की परवरदिगार (इन) काफ़िरों में रूए ज़मीन पर किसी को बसा हुआ न रहने दे
Suhel-Saifur 71:26
27
क्योंकि अगर तू उनको छोड़ देगा तो ये (फिर) तेरे बन्दों को गुमराह करेंगे और उनकी औलाद भी गुनाहगार और कट्टी काफिर ही होगी
Suhel-Saifur 71:27
28
परवरदिगार मुझको और मेरे माँ बाप को और जो मोमिन मेरे घर में आए उनको और तमाम ईमानदार मर्दों और मोमिन औरतों को बख्श दे और (इन) ज़ालिमों की बस तबाही को और ज्यादा कर
Suhel-Saifur 71:28
Nuh suresi tamamlandı