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Suhel-Saifur

Suhel-Saifur
Suhel-Saifur meali ile okumaya başla
Mearic 1 / 44
1
एक माँगने वाले ने काफिरों के लिए होकर रहने वाले अज़ाब को माँगा
Suhel-Saifur 70:1
2
जिसको कोई टाल नहीं सकता
Suhel-Saifur 70:2
3
जो दर्जे वाले ख़ुदा की तरफ से (होने वाला) था
Suhel-Saifur 70:3
4
जिसकी तरफ फ़रिश्ते और रूहुल अमीन चढ़ते हैं (और ये) एक दिन में इतनी मुसाफ़त तय करते हैं जिसका अन्दाज़ा पचास हज़ार बरस का होगा
Suhel-Saifur 70:4
5
तो तुम अच्छी तरह इन तक़लीफों को बरदाश्त करते रहो
Suhel-Saifur 70:5
6
वह (क़यामत) उनकी निगाह में बहुत दूर है
Suhel-Saifur 70:6
7
और हमारी नज़र में नज़दीक है
Suhel-Saifur 70:7
8
जिस दिन आसमान पिघले हुए ताँबे का सा हो जाएगा
Suhel-Saifur 70:8
9
और पहाड़ धुनके हुए ऊन का सा
Suhel-Saifur 70:9
10
बावजूद कि एक दूसरे को देखते होंगे
Suhel-Saifur 70:10
11
कोई किसी दोस्त को न पूछेगा गुनेहगार तो आरज़ू करेगा कि काश उस दिन के अज़ाब के बदले उसके बेटों
Suhel-Saifur 70:11
12
और उसकी बीवी और उसके भाई
Suhel-Saifur 70:12
13
और उसके कुनबे को जिसमें वह रहता था
Suhel-Saifur 70:13
14
और जितने आदमी ज़मीन पर हैं सब को ले ले और उसको छुटकारा दे दें
Suhel-Saifur 70:14
15
(मगर) ये हरगिज़ न होगा
Suhel-Saifur 70:15
16
जहन्नुम की वह भड़कती आग है कि खाल उधेड़ कर रख देगी
Suhel-Saifur 70:16
17
(और) उन लोगों को अपनी तरफ बुलाती होगी
Suhel-Saifur 70:17
18
जिन्होंने (दीन से) पीठ फेरी और मुँह मोड़ा और (माल जमा किया)
Suhel-Saifur 70:18
19
और बन्द कर रखा बेशक इन्सान बड़ा लालची पैदा हुआ है
Suhel-Saifur 70:19
20
जब उसे तक़लीफ छू भी गयी तो घबरा गया
Suhel-Saifur 70:20
21
और जब उसे ज़रा फराग़ी हासिल हुई तो बख़ील बन बैठा
Suhel-Saifur 70:21
22
मगर जो लोग नमाज़ पढ़ते हैं
Suhel-Saifur 70:22
23
जो अपनी नमाज़ का इल्तज़ाम रखते हैं
Suhel-Saifur 70:23
24
और जिनके माल में माँगने वाले और न माँगने वाले के
Suhel-Saifur 70:24
25
लिए एक मुक़र्रर हिस्सा है
Suhel-Saifur 70:25
26
और जो लोग रोज़े जज़ा की तस्दीक़ करते हैं
Suhel-Saifur 70:26
27
और जो लोग अपने परवरदिगार के अज़ाब से डरते रहते हैं
Suhel-Saifur 70:27
28
बेशक उनको परवरदिगार के अज़ाब से बेख़ौफ न होना चाहिए
Suhel-Saifur 70:28
29
और जो लोग अपनी शर्मगाहों को अपनी बीवियों और अपनी लौन्डियों के सिवा से हिफाज़त करते हैं
Suhel-Saifur 70:29
30
तो इन लोगों की हरगिज़ मलामत न की जाएगी
Suhel-Saifur 70:30