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Suhel-Saifur

Suhel-Saifur
Suhel-Saifur meali ile okumaya başla
Kamer 1 / 55
1
क़यामत क़रीब आ गयी और चाँद दो टुकड़े हो गया
Suhel-Saifur 54:1
2
और अगर ये कुफ्फ़ार कोई मौजिज़ा देखते हैं, तो मुँह फेर लेते हैं, और कहते हैं कि ये तो बड़ा ज़बरदस्त जादू है
Suhel-Saifur 54:2
3
और उन लोगों ने झुठलाया और अपनी नफ़सियानी ख्वाहिशों की पैरवी की, और हर काम का वक्त मुक़र्रर है
Suhel-Saifur 54:3
4
और उनके पास तो वह हालात पहुँच चुके हैं जिनमें काफी तम्बीह थीं
Suhel-Saifur 54:4
5
और इन्तेहा दर्जे की दानाई मगर (उनको तो) डराना कुछ फ़ायदा नहीं देता
Suhel-Saifur 54:5
6
तो (ऐ रसूल) तुम भी उनसे किनाराकश रहो, जिस दिन एक बुलाने वाला (इसराफ़ील) एक अजनबी और नागवार चीज़ की तरफ़ बुलाएगा
Suhel-Saifur 54:6
7
तो (निदामत से) ऑंखें नीचे किए हुए कब्रों से निकल पड़ेंगे गोया वह फैली हुई टिड्डियाँ हैं
Suhel-Saifur 54:7
8
(और) बुलाने वाले की तरफ गर्दनें बढ़ाए दौड़ते जाते होंगे, कुफ्फ़ार कहेंगे ये तो बड़ा सख्त दिन है
Suhel-Saifur 54:8
9
इनसे पहले नूह की क़ौम ने भी झुठलाया था, तो उन्होने हमारे (ख़ास) बन्दे (नूह) को झुठलाया, और कहने लगे ये तो दीवाना है
Suhel-Saifur 54:9
10
और उनको झिड़कियाँ भी दी गयीं, तो उन्होंने अपने परवरदिगार से दुआ की कि (बारे इलाहा मैं) इनके मुक़ाबले में कमज़ोर हूँ
Suhel-Saifur 54:10
11
तो अब तू ही (इनसे) बदला ले तो हमने मूसलाधार पानी से आसमान के दरवाज़े खोल दिए
Suhel-Saifur 54:11
12
और ज़मीन से चश्में जारी कर दिए, तो एक काम के लिए जो मुक़र्रर हो चुका था (दोनों) पानी मिलकर एक हो गया
Suhel-Saifur 54:12
13
और हमने एक कश्ती पर जो तख्तों और कीलों से तैयार की गयी थी सवार किया
Suhel-Saifur 54:13
14
और वह हमारी निगरानी में चल रही थी (ये) उस शख़्श (नूह) का बदला लेने के लिए जिसको लोग न मानते थे
Suhel-Saifur 54:14
15
और हमने उसको एक इबरत बना कर छोड़ा तो कोई है जो इबरत हासिल करे
Suhel-Saifur 54:15
16
तो (उनको) मेरा अज़ाब और डराना कैसा था
Suhel-Saifur 54:16
17
और हमने तो क़ुरान को नसीहत हासिल करने के वास्ते आसान कर दिया है तो कोई है जो नसीहत हासिल करे
Suhel-Saifur 54:17
18
आद (की क़ौम ने) (अपने पैग़म्बर) को झुठलाया तो (उनका) मेरा अज़ाब और डराना कैसा था,
Suhel-Saifur 54:18
19
हमने उन पर बहुत सख्त मनहूस दिन में बड़े ज़न्नाटे की ऑंधी चलायी
Suhel-Saifur 54:19
20
जो लोगों को (अपनी जगह से) इस तरह उखाड़ फेकती थी गोया वह उखड़े हुए खजूर के तने हैं
Suhel-Saifur 54:20
21
तो (उनको) मेरा अज़ाब और डराना कैसा था
Suhel-Saifur 54:21
22
और हमने तो क़ुरान को नसीहत हासिल करने के वास्ते आसान कर दिया, तो कोई है जो नसीहत हासिल करे
Suhel-Saifur 54:22
23
(क़ौम) समूद ने डराने वाले (पैग़म्बरों) को झुठलाया
Suhel-Saifur 54:23
24
तो कहने लगे कि भला एक आदमी की जो हम ही में से हो उसकी पैरवीं करें ऐसा करें तो गुमराही और दीवानगी में पड़ गए
Suhel-Saifur 54:24
25
क्या हम सबमें बस उसी पर वही नाज़िल हुई है (नहीं) बल्कि ये तो बड़ा झूठा तअल्ली करने वाला है
Suhel-Saifur 54:25
26
उनको अनक़रीब कल ही मालूम हो जाएगा कि कौन बड़ा झूठा तकब्बुर करने वाला है
Suhel-Saifur 54:26
27
(ऐ सालेह) हम उनकी आज़माइश के लिए ऊँटनी भेजने वाले हैं तो तुम उनको देखते रहो और (थोड़ा) सब्र करो
Suhel-Saifur 54:27
28
और उनको ख़बर कर दो कि उनमें पानी की बारी मुक़र्रर कर दी गयी है हर (बारी वाले को अपनी) बारी पर हाज़िर होना चाहिए
Suhel-Saifur 54:28
29
तो उन लोगों ने अपने रफीक़ (क़ेदार) को बुलाया तो उसने पकड़ कर (ऊँटनी की) कूंचे काट डालीं
Suhel-Saifur 54:29
30
तो (देखो) मेरा अज़ाब और डराना कैसा था
Suhel-Saifur 54:30