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Suhel-Saifur

Suhel-Saifur
Suhel-Saifur meali ile okumaya başla
Necm 1 / 62
1
तारे की क़सम जब टूटा
Suhel-Saifur 53:1
2
कि तुम्हारे रफ़ीक़ (मोहम्मद) न गुमराह हुए और न बहके
Suhel-Saifur 53:2
3
और वह तो अपनी नफ़सियानी ख्वाहिश से कुछ भी नहीं कहते
Suhel-Saifur 53:3
4
ये तो बस वही है जो भेजी जाती है
Suhel-Saifur 53:4
5
इनको निहायत ताक़तवर (फ़रिश्ते जिबरील) ने तालीम दी है
Suhel-Saifur 53:5
6
जो बड़ा ज़बरदस्त है और जब ये (आसमान के) ऊँचे (मुशरक़ो) किनारे पर था तो वह अपनी (असली सूरत में) सीधा खड़ा हुआ
Suhel-Saifur 53:6
7
फिर करीब हो (और आगे) बढ़ा
Suhel-Saifur 53:7
8
(फिर जिबरील व मोहम्मद में) दो कमान का फ़ासला रह गया
Suhel-Saifur 53:8
9
बल्कि इससे भी क़रीब था
Suhel-Saifur 53:9
10
ख़ुदा ने अपने बन्दे की तरफ जो 'वही' भेजी सो भेजी
Suhel-Saifur 53:10
11
तो जो कुछ उन्होने देखा उनके दिल ने झूठ न जाना
Suhel-Saifur 53:11
12
तो क्या वह (रसूल) जो कुछ देखता है तुम लोग उसमें झगड़ते हो
Suhel-Saifur 53:12
13
और उन्होने तो उस (जिबरील) को एक बार (शबे मेराज) और देखा है
Suhel-Saifur 53:13
14
सिदरतुल मुनतहा के नज़दीक
Suhel-Saifur 53:14
15
उसी के पास तो रहने की बेहिश्त है
Suhel-Saifur 53:15
16
जब छा रहा था सिदरा पर जो छा रहा था
Suhel-Saifur 53:16
17
(उस वक्त भी) उनकी ऑंख न तो और तरफ़ माएल हुई और न हद से आगे बढ़ी
Suhel-Saifur 53:17
18
और उन्होने यक़ीनन अपने परवरदिगार (की क़ुदरत) की बड़ी बड़ी निशानियाँ देखीं
Suhel-Saifur 53:18
19
तो भला तुम लोगों ने लात व उज्ज़ा और तीसरे पिछले मनात को देखा
Suhel-Saifur 53:19
20
(भला ये ख़ुदा हो सकते हैं)
Suhel-Saifur 53:20
21
क्या तुम्हारे तो बेटे हैं और उसके लिए बेटियाँ
Suhel-Saifur 53:21
22
ये तो बहुत बेइन्साफ़ी की तक़सीम है
Suhel-Saifur 53:22
23
ये तो बस सिर्फ नाम ही नाम है जो तुमने और तुम्हारे बाप दादाओं ने गढ़ लिए हैं, ख़ुदा ने तो इसकी कोई सनद नाज़िल नहीं की ये लोग तो बस अटकल और अपनी नफ़सानी ख्वाहिश के पीछे चल रहे हैं हालॉकि उनके पास उनके परवरदिगार की तरफ से हिदायत भी आ चुकी है
Suhel-Saifur 53:23
24
क्या जिस चीज़ की इन्सान तमन्ना करे वह उसे ज़रूर मिलती है
Suhel-Saifur 53:24
25
आख़ेरत और दुनिया तो ख़ास ख़ुदा ही के एख्तेयार में हैं
Suhel-Saifur 53:25
26
और आसमानों में बहुत से फरिश्ते हैं जिनकी सिफ़ारिश कुछ भी काम न आती, मगर ख़ुदा जिसके लिए चाहे इजाज़त दे दे और पसन्द करे उसके बाद (सिफ़ारिश कर सकते हैं)
Suhel-Saifur 53:26
27
जो लोग आख़ेरत पर ईमान नहीं रखते वह फ़रिश्तों के नाम रखते हैं औरतों के से नाम हालॉकि उन्हें इसकी कुछ ख़बर नहीं
Suhel-Saifur 53:27
28
वह लोग तो बस गुमान (ख्याल) के पीछे चल रहे हैं, हालॉकि गुमान यक़ीन के बदले में कुछ भी काम नहीं आया करता,
Suhel-Saifur 53:28
29
तो जो हमारी याद से रदगिरदानी करे ओर सिर्फ दुनिया की ज़िन्दगी ही का तालिब हो तुम भी उससे मुँह फेर लो
Suhel-Saifur 53:29
30
उनके इल्म की यही इन्तिहा है तुम्हारा परवरदिगार, जो उसके रास्ते से भटक गया उसको भी ख़ूब जानता है, और जो राहे रास्त पर है उनसे भी ख़ूब वाक़िफ है
Suhel-Saifur 53:30