2
और उसकी किताब (लौहे महफूज़) की
3
जो क़ुशादा औराक़ में लिखी हुई है
4
और बैतुल मामूर की (जो काबा के सामने फरिश्तों का क़िब्ला है)
6
और जोश व ख़रोश वाले समन्दर की
7
कि तुम्हारे परवरदिगार का अज़ाब बेशक वाकेए होकर रहेगा
8
(और) इसका कोई रोकने वाला नहीं
9
जिस दिन आसमान चक्कर खाने लगेगा
11
तो उस दिन झुठलाने वालों की ख़राबी है
12
जो लोग बातिल में पड़े खेल रहे हैं
13
जिस दिन जहन्नुम की आग की तरफ उनको ढकेल ढकेल ले जाएँगे
14
(और उनसे कहा जाएगा) यही वह जहन्नुम है जिसे तुम झुठलाया करते थे
15
तो क्या ये जादू है या तुमको नज़र ही नहीं आता
16
इसी में घुसो फिर सब्र करो या बेसब्री करो (दोनों) तुम्हारे लिए यकसाँ हैं तुम्हें तो बस उन्हीं कामों का बदला मिलेगा जो तुम किया करते थे
17
बेशक परहेज़गार लोग बाग़ों और नेअमतों में होंगे
18
जो (जो नेअमतें) उनके परवरदिगार ने उन्हें दी हैं उनके मज़े ले रहे हैं और उनका परवरदिगार उन्हें दोज़ख़ के अज़ाब से बचाएगा
19
जो जो कारगुज़ारियाँ तुम कर चुके हो उनके सिले में (आराम से) तख्तों पर जो बराबर बिछे हुए हैं
20
तकिए लगाकर ख़ूब मज़े से खाओ पियो और हम बड़ी बड़ी ऑंखों वाली हूर से उनका ब्याह रचाएँगे
21
और जिन लोगों ने ईमान क़ुबूल किया और उनकी औलाद ने भी ईमान में उनका साथ दिया तो हम उनकी औलाद को भी उनके दर्जे पहुँचा देंगे और हम उनकी कारगुज़ारियों में से कुछ भी कम न करेंगे हर शख़्श अपने आमाल के बदले में गिरवी है
22
और जिस क़िस्म के मेवे और गोश्त को उनका जी चाहेगा हम उन्हें बढ़ाकर अता करेंगे
23
वहाँ एक दूसरे से शराब का जाम ले लिया करेंगे जिसमें न कोई बेहूदगी है और न गुनाह
24
(और ख़िदमत के लिए) नौजवान लड़के उनके आस पास चक्कर लगाया करेंगे वह (हुस्न व जमाल में) गोया एहतियात से रखे हुए मोती हैं
25
और एक दूसरे की तरफ रूख़ करके (लुत्फ की) बातें करेंगे
26
(उनमें से कुछ) कहेंगे कि हम इससे पहले अपने घर में (ख़ुदा से बहुत) डरा करते थे
27
तो ख़ुदा ने हम पर बड़ा एहसान किया और हमको (जहन्नुम की) लौ के अज़ाब से बचा लिया
28
इससे क़ब्ल हम उनसे दुआएँ किया करते थे बेशक वह एहसान करने वाला मेहरबान है
29
तो (ऐ रसूल) तुम नसीहत किए जाओ तो तुम अपने परवरदिगार के फज़ल से न काहिन हो और न मजनून किया
30
क्या (तुमको) ये लोग कहते हैं कि (ये) शायर हैं (और) हम तो उसके बारे में ज़माने के हवादिस का इन्तेज़ार कर रहे हैं
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