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Suhel-Saifur

Suhel-Saifur
Suhel-Saifur meali ile okumaya başla
Saffat 1 / 182
1
(इबादत या जिहाद में) पर बाँधने वालों की (क़सम)
Suhel-Saifur 37:1
2
फिर (बदों को बुराई से) झिड़क कर डाँटने वाले की (क़सम)
Suhel-Saifur 37:2
3
फिर कुरान पढ़ने वालों की क़सम है
Suhel-Saifur 37:3
4
तुम्हारा माबूद (यक़ीनी) एक ही है
Suhel-Saifur 37:4
5
जो सारे आसमान ज़मीन का और जो कुछ इन दोनों के दरमियान है (सबका) परवरदिगार है
Suhel-Saifur 37:5
6
और (चाँद सूरज तारे के) तुलूउ व (गुरूब) के मक़ामात का भी मालिक है हम ही ने नीचे वाले आसमान को तारों की आरइश (जगमगाहट) से आरास्ता किया
Suhel-Saifur 37:6
7
और (तारों को) हर सरकश शैतान से हिफ़ाज़त के वास्ते (भी पैदा किया)
Suhel-Saifur 37:7
8
कि अब शैतान आलमे बाला की तरफ़ कान भी नहीं लगा सकते और (जहाँ सुन गुन लेना चाहा तो) हर तरफ़ से खदेड़ने के लिए शहाब फेके जाते हैं
Suhel-Saifur 37:8
9
और उनके लिए पाएदार अज़ाब है
Suhel-Saifur 37:9
10
मगर जो (शैतान शाज़ व नादिर फरिश्तों की) कोई बात उचक ले भागता है तो आग का दहकता हुआ तीर उसका पीछा करता है
Suhel-Saifur 37:10
11
तो (ऐ रसूल) तुम उनसे पूछो तो कि उनका पैदा करना ज्यादा दुश्वार है या उन (मज़कूरा) चीज़ों का जिनको हमने पैदा किया हमने तो उन लोगों को लसदार मिट्टी से पैदा किया
Suhel-Saifur 37:11
12
बल्कि तुम (उन कुफ्फ़ार के इन्कार पर) ताज्जुब करते हो और वह लोग (तुमसे) मसख़रापन करते हैं
Suhel-Saifur 37:12
13
और जब उन्हें समझाया जाता है तो समझते नहीं हैं
Suhel-Saifur 37:13
14
और जब किसी मौजिजे क़ो देखते हैं तो (उससे) मसख़रापन करते हैं
Suhel-Saifur 37:14
15
और कहते हैं कि ये तो बस खुला हुआ जादू है
Suhel-Saifur 37:15
16
भला जब हम मर जाएँगे और ख़ाक और हड्डियाँ रह जाएँगे
Suhel-Saifur 37:16
17
तो क्या हम या हमारे अगले बाप दादा फिर दोबारा क़ब्रों से उठा खड़े किए जाँएगे
Suhel-Saifur 37:17
18
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि हाँ (ज़रूर उठाए जाओगे)
Suhel-Saifur 37:18
19
और तुम ज़लील होगे और वह (क़यामत) तो एक ललकार होगी फिर तो वह लोग फ़ौरन ही (ऑंखे फाड़-फाड़ के) देखने लगेंगे
Suhel-Saifur 37:19
20
और कहेंगे हाए अफसोस ये तो क़यामत का दिन है
Suhel-Saifur 37:20
21
(जवाब आएगा) ये वही फैसले का दिन है जिसको तुम लोग (दुनिया में) झूठ समझते थे
Suhel-Saifur 37:21
22
(और फ़रिश्तों को हुक्म होगा कि) जो लोग (दुनिया में) सरकशी करते थे उनको और उनके साथियों को और खुदा को छोड़कर जिनकी परसतिश करते हैं
Suhel-Saifur 37:22
23
उनको (सबको) इकट्ठा करो फिर उन्हें जहन्नुम की राह दिखाओ
Suhel-Saifur 37:23
24
और (हाँ ज़रा) उन्हें ठहराओ तो उनसे कुछ पूछना है
Suhel-Saifur 37:24
25
(अरे कमबख्तों) अब तुम्हें क्या होगा कि एक दूसरे की मदद नहीं करते
Suhel-Saifur 37:25
26
(जवाब क्या देंगे) बल्कि वह तो आज गर्दन झुकाए हुए हैं
Suhel-Saifur 37:26
27
और एक दूसरे की तरफ मुतावज्जे होकर बाहम पूछताछ करेंगे
Suhel-Saifur 37:27
28
(और इन्सान शयातीन से) कहेंगे कि तुम ही तो हमारी दाहिनी तरफ से (हमें बहकाने को) चढ़ आते थे
Suhel-Saifur 37:28
29
वह जवाब देगें (हम क्या जानें) तुम तो खुद ईमान लाने वाले न थे
Suhel-Saifur 37:29
30
और (साफ़ तो ये है कि) हमारी तुम पर कुछ हुकूमत तो थी नहीं बल्कि तुम खुद सरकश लोग थे
Suhel-Saifur 37:30