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Suhel-Saifur

Suhel-Saifur
Suhel-Saifur meali ile okumaya başla
Müminun 1 / 118
1
अलबत्ता वह ईमान लाने वाले रस्तगार हुए
Suhel-Saifur 23:1
2
जो अपनी नमाज़ों में (खुदा के सामने) गिड़गिड़ाते हैं
Suhel-Saifur 23:2
3
और जो बेहूदा बातों से मुँह फेरे रहते हैं
Suhel-Saifur 23:3
4
और जो ज़कात (अदा) किया करते हैं
Suhel-Saifur 23:4
5
और जो (अपनी) शर्मगाहों को (हराम से) बचाते हैं
Suhel-Saifur 23:5
6
मगर अपनी बीबियों से या अपनी ज़र ख़रीद लौनडियों से कि उन पर हरगिज़ इल्ज़ाम नहीं हो सकता
Suhel-Saifur 23:6
7
पस जो शख्स उसके सिवा किसी और तरीके से शहवत परस्ती की तमन्ना करे तो ऐसे ही लोग हद से बढ़ जाने वाले हैं
Suhel-Saifur 23:7
8
और जो अपनी अमानतों और अपने एहद का लिहाज़ रखते हैं
Suhel-Saifur 23:8
9
और जो अपनी नमाज़ों की पाबन्दी करते हैं
Suhel-Saifur 23:9
10
(आदमी की औलाद में) यही लोग सच्चे वारिस है
Suhel-Saifur 23:10
11
जो बेहश्त बरी का हिस्सा लेंगे (और) यही लोग इसमें हमेशा (जिन्दा) रहेंगे
Suhel-Saifur 23:11
12
और हमने आदमी को गीली मिट्टी के जौहर से पैदा किया
Suhel-Saifur 23:12
13
फिर हमने उसको एक महफूज़ जगह (औरत के रहम में) नुत्फ़ा बना कर रखा
Suhel-Saifur 23:13
14
फिर हम ही ने नुतफ़े को जमा हुआ ख़ून बनाया फिर हम ही ने मुनजमिद खून को गोश्त का लोथड़ा बनाया हम ही ने लोथडे क़ी हड्डियाँ बनायीं फिर हम ही ने हड्डियों पर गोश्त चढ़ाया फिर हम ही ने उसको (रुह डालकर) एक दूसरी सूरत में पैदा किया तो (सुबहान अल्लाह) ख़ुदा बा बरकत है जो सब बनाने वालो से बेहतर है
Suhel-Saifur 23:14
15
फिर इसके बाद यक़ीनन तुम सब लोगों को (एक न एक दिन) मरना है
Suhel-Saifur 23:15
16
इसके बाद कयामत के दिन तुम सब के सब कब्रों से उठाए जाओगे
Suhel-Saifur 23:16
17
और हम ही ने तुम्हारे ऊपर तह ब तह आसमान बनाए और हम मख़लूक़ात से बेखबर नही है
Suhel-Saifur 23:17
18
और हमने आसमान से एक अन्दाजे क़े साथ पानी बरसाया फिर उसको ज़मीन में (हसब मसलेहत) ठहराए रखा और हम तो यक़ीनन उसके ग़ाएब कर देने पर भी क़ाबू रखते है
Suhel-Saifur 23:18
19
फिर हमने उस पानी से तुम्हारे वास्ते खजूरों और अंगूरों के बाग़ात बनाए कि उनमें तुम्हारे वास्ते (तरह तरह के) बहुतेरे मेवे (पैदा होते) हैं उनमें से बाज़ को तुम खाते हो
Suhel-Saifur 23:19
20
और (हम ही ने ज़ैतून का) दरख्त (पैदा किया) जो तूरे सैना (पहाड़) में (कसरत से) पैदा होता है जिससे तेल भी निकलता है और खाने वालों के लिए सालन भी है
Suhel-Saifur 23:20
21
और उसमें भी शक नहीं कि तुम्हारे वास्ते चौपायों में भी इबरत की जगह है और (ख़ाक बला) जो कुछ उनके पेट में है उससे हम तुमको दूध पिलाते हैं और जानवरों में तो तुम्हारे और भी बहुत से फायदे हैं और उन्हीं में से बाज़ तुम खाते हो
Suhel-Saifur 23:21
22
और उन्हें जानवरों और कश्तियों पर चढे चढ़े फिरते भी हो
Suhel-Saifur 23:22
23
और हमने नूह को उनकी काैम के पास पैग़म्बर बनाकर भेजा तो नूह ने (उनसे) कहा ऐ मेरी क़ौम खुदा ही की इबादत करो उसके सिवा कोई तुम्हारा माबूद नहीं तो क्या तुम (उससे) डरते नहीं हो
Suhel-Saifur 23:23
24
तो उनकी क़ौम के सरदारों ने जो काफिर थे कहा कि ये भी तो बस (आख़िर) तुम्हारे ही सा आदमी है (मगर) इसकी तमन्ना ये है कि तुम पर बुर्जुगी हासिल करे और अगर खुदा (पैग़म्बर ही न भेजना) चाहता तो फरिश्तों को नाज़िल करता हम ने तो (भाई) ऐसी बात अपने अगले बाप दादाओं में (भी होती) नहीं सुनी
Suhel-Saifur 23:24
25
हो न हों बस ये एक आदमी है जिसे जुनून हो गया है ग़रज़ तुम लोग एक (ख़ास) वक्त तक (इसके अन्जाम का) इन्तेज़ार देखो
Suhel-Saifur 23:25
26
नूह ने (ये बातें सुनकर) दुआ की ऐ मेरे पलने वाले मेरी मदद कर
Suhel-Saifur 23:26
27
इस वजह से कि उन लोगों ने मुझे झुठला दिया तो हमने नूह के पास 'वही' भेजी कि तुम हमारे सामने हमारे हुक्म के मुताबिक़ कश्ती बनाना शुरु करो फिर जब कल हमारा अज़ाब आ जाए और तन्नूर (से पानी) उबलने लगे तो तुम उसमें हर किस्म (के जानवरों में) से (नर मादा) दो दो का जोड़ा और अपने लड़के बालों को बिठा लो मगर उन में से जिसकी निस्बत (ग़रक़ होने का) पहले से हमारा हुक्म हो चुका है (उन्हें छोड़ दो) और जिन लोगों ने (हमारे हुकम से) सरकशी की है उनके बारे में मुझसे कुछ कहना (सुनना) नहीं क्योंकि ये लोग यकीनन डूबने वाले है
Suhel-Saifur 23:27
28
ग़रज़ जब तुम अपने हमराहियों के साथ कश्ती पर दुरुस्त बैठो तो कहो तमाम हम्दो सना की सज़ावार खुदा ही है जिसने हमको ज़ालिम लोगों से नजात दी
Suhel-Saifur 23:28
29
और दुआ करो कि ऐ मेरे पालने वाले तू मुझको (दरख्त के पानी की) बा बरकत जगह में उतारना और तू तो सब उतारने वालो ंसे बेहतर है
Suhel-Saifur 23:29
30
इसमें शक नहीं कि हसमें (हमारी क़ुदरत की) बहुत सी निशानियाँ हैं और हमको तो बस उनका इम्तिहान लेना मंज़ूर था
Suhel-Saifur 23:30