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Suhel-Saifur

Suhel-Saifur
Suhel-Saifur meali ile okumaya başla
Ta Ha 1 / 135
1
ऐ ता हा (रसूलअल्लाह)
Suhel-Saifur 20:1
2
हमने तुम पर कुरान इसलिए नाज़िल नहीं किया कि तुम (इस क़दर) मशक्क़त उठाओ
Suhel-Saifur 20:2
3
मगर जो शख्स खुदा से डरता है उसके लिए नसीहत (क़रार दिया है)
Suhel-Saifur 20:3
4
(ये) उस शख्स की तरफ़ से नाज़िल हुआ है जिसने ज़मीन और ऊँचे-ऊँचे आसमानों को पैदा किया
Suhel-Saifur 20:4
5
वही रहमान है जो अर्श पर (हुक्मरानी के लिए) आमादा व मुस्तईद है
Suhel-Saifur 20:5
6
जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है और जो कुछ दोनों के बीच में है और जो कुछ ज़मीन के नीचे है (ग़रज़ सब कुछ) उसी का है
Suhel-Saifur 20:6
7
और अगर तू पुकार कर बात करे (तो भी आहिस्ता करे तो भी) वह यक़ीनन भेद और उससे ज्यादा पोशीदा चीज़ को जानता है
Suhel-Saifur 20:7
8
अल्लाह (वह माबूद है कि) उसके सिवा कोइ माबूद नहीं है (अच्छे-अच्छे) उसी के नाम हैं
Suhel-Saifur 20:8
9
और (ऐ रसूल) क्या तुम तक मूसा की ख़बर पहुँची है कि जब उन्होंने दूर से आग देखी
Suhel-Saifur 20:9
10
तो अपने घर के लोगों से कहने लगे कि तुम लोग (ज़रा यहीं) ठहरो मैंने आग देखी है क्या अजब है कि मैं वहाँ (जाकर) उसमें से एक अंगारा तुम्हारे पास ले आऊँ या आग के पास किसी राह का पता पा जाऊँ
Suhel-Saifur 20:10
11
फिर जब मूसा आग के पास आए तो उन्हें आवाज आई
Suhel-Saifur 20:11
12
कि ऐ मूसा बेशक मैं ही तुम्हारा परवरदिगार हूँ तो तुम अपनी जूतियाँ उतार डालो क्योंकि तुम (इस वक्त) तुआ (नामी) पाक़ीज़ा चटियल मैदान में हो
Suhel-Saifur 20:12
13
और मैंने तुमको पैग़म्बरी के वास्ते मुन्तख़िब किया (चुन लिया) है तो जो कुछ तुम्हारी तरफ़ वही की जाती है उसे कान लगा कर सुनो
Suhel-Saifur 20:13
14
इसमें शक नहीं कि मैं ही वह अल्लाह हूँ कि मेरे सिवा कोई माबूद नहीं तो मेरी ही इबादत करो और मेरी याद के लिए नमाज़ बराबर पढ़ा करो
Suhel-Saifur 20:14
15
(क्योंकि) क़यामत ज़रूर आने वाली है और मैं उसे लामहौला छिपाए रखूँगा ताकि हर शख्स (उसके ख़ौफ से नेकी करे) और वैसी कोशिश की है उसका उसे बदला दिया जाए
Suhel-Saifur 20:15
16
तो (कहीं) ऐसा न हो कि जो शख्स उसे दिल से नहीं मानता और अपनी नफ़सियानी ख्वाहिश के पीछे पड़ा वह तुम्हें इस (फिक्र) से रोक दे तो तुम तबाह हो जाओगे
Suhel-Saifur 20:16
17
और ऐ मूसा ये तुम्हारे दाहिने हाथ में क्या चीज़ है
Suhel-Saifur 20:17
18
अर्ज़ की ये तो मेरी लाठी है मैं उस पर सहारा करता हूँ और इससे अपनी बकरियों पर (और दरख्तों की) पत्तियाँ झाड़ता हूँ और उसमें मेरे और भी मतलब हैं
Suhel-Saifur 20:18
19
फ़रमाया ऐ मूसा उसको ज़रा ज़मीन पर डाल तो दो मूसा ने उसे डाल दिया
Suhel-Saifur 20:19
20
तो फ़ौरन वह साँप बनकर दौड़ने लगा (ये देखकर मूसा भागे)
Suhel-Saifur 20:20
21
तो फ़रमाया कि तुम इसको पकड़ लो और डरो नहीं मैं अभी इसकी पहली सी सूरत फिर किए देता हूँ
Suhel-Saifur 20:21
22
और अपने हाथ को समेंट कर अपने बग़ल में तो कर लो (फिर देखो कि) वह बग़ैर किसी बीमारी के सफेद चमकता दमकता हुआ निकलेगा ये दूसरा मौजिज़ा है
Suhel-Saifur 20:22
23
(ये) ताकि हम तुमको अपनी (कुदरत की) बड़ी-बड़ी निशानियाँ दिखाएँ
Suhel-Saifur 20:23
24
अब तुम फिरऔन के पास जाओ उसने बहुत सर उठाया है
Suhel-Saifur 20:24
25
मूसा ने अर्ज़ की परवरदिगार (मैं जाता तो हूँ)
Suhel-Saifur 20:25
26
मगर तू मेरे लिए मेरे सीने को कुशादा फरमा
Suhel-Saifur 20:26
27
और दिलेर बना और मेरा काम मेरे लिए आसान कर दे और मेरी ज़बान से लुक़नत की गिरह खोल दे
Suhel-Saifur 20:27
28
ताकि लोग मेरी बात अच्छी तरह समझें और
Suhel-Saifur 20:28
29
मेरे कीनेवालों में से मेरे भाई हारून
Suhel-Saifur 20:29
30
को मेरा वज़ीर बोझ बटाने वाला बना दे
Suhel-Saifur 20:30