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Suhel-Saifur

Suhel-Saifur
Suhel-Saifur meali ile okumaya başla
Adiyat 1 / 11
1
(ग़ाज़ियों के) सरपट दौड़ने वाले घोड़ो की क़सम
Suhel-Saifur 100:1
2
जो नथनों से फ़रराटे लेते हैं
Suhel-Saifur 100:2
3
फिर पत्थर पर टाप मारकर चिंगारियाँ निकालते हैं फिर सुबह को छापा मारते हैं
Suhel-Saifur 100:3
4
(तो दौड़ धूप से) बुलन्द कर देते हैं
Suhel-Saifur 100:4
5
फिर उस वक्त (दुश्मन के) दिल में घुस जाते हैं
Suhel-Saifur 100:5
6
(ग़रज़ क़सम है) कि बेशक इन्सान अपने परवरदिगार का नाशुक्रा है
Suhel-Saifur 100:6
7
और यक़ीनी ख़ुदा भी उससे वाक़िफ़ है
Suhel-Saifur 100:7
8
और बेशक वह माल का सख्त हरीस है
Suhel-Saifur 100:8
9
तो क्या वह ये नहीं जानता कि जब मुर्दे क़ब्रों से निकाले जाएँगे
Suhel-Saifur 100:9
10
और दिलों के भेद ज़ाहिर कर दिए जाएँगे
Suhel-Saifur 100:10
11
बेशक उस दिन उनका परवरदिगार उनसे ख़ूब वाक़िफ़ होगा
Suhel-Saifur 100:11
Adiyat suresi tamamlandı