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M.Farooq-M.Ahmed

M.Farooq-M.Ahmed
M.Farooq-M.Ahmed meali ile okumaya başla
Alak 1 / 19
1
पढ़ो, अपने रब के नाम के साथ जिसने पैदा किया,
M.Farooq-M.Ahmed 96:1
2
पैदा किया मनुष्य को जमे हुए ख़ून के एक लोथड़े से
M.Farooq-M.Ahmed 96:2
3
पढ़ो, हाल यह है कि तुम्हारा रब बड़ा ही उदार है,
M.Farooq-M.Ahmed 96:3
4
जिसने क़लम के द्वारा शिक्षा दी,
M.Farooq-M.Ahmed 96:4
5
मनुष्य को वह ज्ञान प्रदान किया जिस वह न जानता था
M.Farooq-M.Ahmed 96:5
6
कदापि नहीं, मनुष्य सरकशी करता है,
M.Farooq-M.Ahmed 96:6
7
इसलिए कि वह अपने आपको आत्मनिर्भर देखता है
M.Farooq-M.Ahmed 96:7
8
निश्चय ही तुम्हारे रब ही की ओर पलटना है
M.Farooq-M.Ahmed 96:8
9
क्या तुमने देखा उस व्यक्ति को
M.Farooq-M.Ahmed 96:9
10
जो एक बन्दे को रोकता है, जब वह नमाज़ अदा करता है? -
M.Farooq-M.Ahmed 96:10
11
तुम्हारा क्या विचार है? यदि वह सीधे मार्ग पर हो,
M.Farooq-M.Ahmed 96:11
12
या परहेज़गारी का हुक्म दे (उसके अच्छा होने में क्या संदेह है)
M.Farooq-M.Ahmed 96:12
13
तुम्हारा क्या विचार है? यदि उस (रोकनेवाले) ने झुठलाया और मुँह मोड़ा (तो उसके बुरा होने में क्या संदेह है) -
M.Farooq-M.Ahmed 96:13
14
क्या उसने नहीं जाना कि अल्लाह देख रहा है?
M.Farooq-M.Ahmed 96:14
15
कदापि नहीं, यदि वह बाज़ न आया तो हम चोटी पकड़कर घसीटेंगे,
M.Farooq-M.Ahmed 96:15
16
झूठी, ख़ताकार चोटी
M.Farooq-M.Ahmed 96:16
17
अब बुला ले वह अपनी मजलिस को!
M.Farooq-M.Ahmed 96:17
18
हम भी बुलाए लेते है सिपाहियों को
M.Farooq-M.Ahmed 96:18
19
कदापि नहीं, उसकी बात न मानो और सजदे करते और क़रीब होते रहो
M.Farooq-M.Ahmed 96:19
Alak suresi tamamlandı