2
और रात जबकि उसका सन्नाटा छा जाए
3
तुम्हारे रब ने तुम्हें न तो विदा किया और न वह बेज़ार (अप्रसन्न) हुआ
4
और निश्चय ही बाद में आनेवाली (अवधि) तुम्हारे लिए पहलेवाली से उत्तम है
5
और शीघ्र ही तुम्हारा रब तुम्हें प्रदान करेगा कि तुम प्रसन्न हो जाओगे
6
क्या ऐसा नहीं कि उसने तुम्हें अनाथ पाया तो ठिकाना दिया?
7
और तुम्हें मार्ग से अपरिचित पाया तो मार्ग दिखाया?
8
और तुम्हें निर्धन पाया तो समृद्ध कर दिया?
9
अतः जो अनाथ हो उसे मत दबाना,
10
और जो माँगता हो उसे न झिझकना,
11
और जो तुम्हें रब की अनुकम्पा है, उसे बयान करते रहो