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M.Farooq-M.Ahmed

M.Farooq-M.Ahmed
M.Farooq-M.Ahmed meali ile okumaya başla
Duha 1 / 11
1
साक्षी है चढ़ता दिन,
M.Farooq-M.Ahmed 93:1
2
और रात जबकि उसका सन्नाटा छा जाए
M.Farooq-M.Ahmed 93:2
3
तुम्हारे रब ने तुम्हें न तो विदा किया और न वह बेज़ार (अप्रसन्न) हुआ
M.Farooq-M.Ahmed 93:3
4
और निश्चय ही बाद में आनेवाली (अवधि) तुम्हारे लिए पहलेवाली से उत्तम है
M.Farooq-M.Ahmed 93:4
5
और शीघ्र ही तुम्हारा रब तुम्हें प्रदान करेगा कि तुम प्रसन्न हो जाओगे
M.Farooq-M.Ahmed 93:5
6
क्या ऐसा नहीं कि उसने तुम्हें अनाथ पाया तो ठिकाना दिया?
M.Farooq-M.Ahmed 93:6
7
और तुम्हें मार्ग से अपरिचित पाया तो मार्ग दिखाया?
M.Farooq-M.Ahmed 93:7
8
और तुम्हें निर्धन पाया तो समृद्ध कर दिया?
M.Farooq-M.Ahmed 93:8
9
अतः जो अनाथ हो उसे मत दबाना,
M.Farooq-M.Ahmed 93:9
10
और जो माँगता हो उसे न झिझकना,
M.Farooq-M.Ahmed 93:10
11
और जो तुम्हें रब की अनुकम्पा है, उसे बयान करते रहो
M.Farooq-M.Ahmed 93:11
Duha suresi tamamlandı