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M.Farooq-M.Ahmed

M.Farooq-M.Ahmed
M.Farooq-M.Ahmed meali ile okumaya başla
Şems 1 / 15
1
साक्षी है सूर्य और उसकी प्रभा,
M.Farooq-M.Ahmed 91:1
2
और चन्द्रमा जबकि वह उनके पीछे आए,
M.Farooq-M.Ahmed 91:2
3
और दिन, जबकि वह उसे प्रकट कर दे,
M.Farooq-M.Ahmed 91:3
4
और रात, जबकि वह उसको ढाँक ले
M.Farooq-M.Ahmed 91:4
5
और आकाश और जैसा कुछ उसे उठाया,
M.Farooq-M.Ahmed 91:5
6
और धरती और जैसा कुछ उसे बिछाया
M.Farooq-M.Ahmed 91:6
7
और आत्मा और जैसा कुछ उसे सँवारा
M.Farooq-M.Ahmed 91:7
8
फिर उसके दिल में डाली उसकी बुराई और उसकी परहेज़गारी
M.Farooq-M.Ahmed 91:8
9
सफल हो गया जिसने उसे विकसित किया
M.Farooq-M.Ahmed 91:9
10
और असफल हुआ जिसने उसे दबा दिया
M.Farooq-M.Ahmed 91:10
11
समूद ने अपनी सरकशी से झुठलाया,
M.Farooq-M.Ahmed 91:11
12
जब उनमें का सबसे बड़ा दुर्भाग्यशाली उठ खड़ा हुआ,
M.Farooq-M.Ahmed 91:12
13
तो अल्लाह के रसूल ने उनसे कहा, "सावधान, अल्लाह की ऊँटनी और उसके पिलाने (की बारी) से।"
M.Farooq-M.Ahmed 91:13
14
किन्तु उन्होंने उसे झुठलाया और उस ऊँटनी की कूचें काट डाली। अन्ततः उनके रब ने उनके गुनाह के कारण उनपर तबाही डाल दी और उन्हें बराबर कर दिया
M.Farooq-M.Ahmed 91:14
15
और उसे उसके परिणाम का कोई भय नहीं
M.Farooq-M.Ahmed 91:15
Şems suresi tamamlandı