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M.Farooq-M.Ahmed

M.Farooq-M.Ahmed
M.Farooq-M.Ahmed meali ile okumaya başla
Beled 1 / 20
1
सुनो! मैं क़सम खाता हूँ इस नगर (मक्का) की -
M.Farooq-M.Ahmed 90:1
2
हाल यह है कि तुम इसी नगर में रह रहे हो -
M.Farooq-M.Ahmed 90:2
3
और बाप और उसकी सन्तान की,
M.Farooq-M.Ahmed 90:3
4
निस्संदेह हमने मनुष्य को पूर्ण मशक़्क़त (अनुकूलता और सन्तुलन) के साथ पैदा किया
M.Farooq-M.Ahmed 90:4
5
क्या वह समझता है कि उसपर किसी का बस न चलेगा?
M.Farooq-M.Ahmed 90:5
6
कहता है कि "मैंने ढेरो माल उड़ा दिया।"
M.Farooq-M.Ahmed 90:6
7
क्या वह समझता है कि किसी ने उसे देखा नहीं?
M.Farooq-M.Ahmed 90:7
8
क्या हमने उसे नहीं दी दो आँखें,
M.Farooq-M.Ahmed 90:8
9
और एक ज़बान और दो होंठ?
M.Farooq-M.Ahmed 90:9
10
और क्या ऐसा नहीं है कि हमने दिखाई उसे दो ऊँचाइयाँ?
M.Farooq-M.Ahmed 90:10
11
किन्तु वह तो हुमककर घाटी में से गुजंरा ही नहीं और (न उसने मुक्ति का मार्ग पाया)
M.Farooq-M.Ahmed 90:11
12
और तुम्हें क्या मालूम कि वह घाटी क्या है!
M.Farooq-M.Ahmed 90:12
13
किसी गरदन का छुड़ाना
M.Farooq-M.Ahmed 90:13
14
या भूख के दिन खाना खिलाना
M.Farooq-M.Ahmed 90:14
15
किसी निकटवर्ती अनाथ को,
M.Farooq-M.Ahmed 90:15
16
या धूल-धूसरित मुहताज को;
M.Farooq-M.Ahmed 90:16
17
फिर यह कि वह उन लोगों में से हो जो ईमान लाए और जिन्होंने एक-दूसरे को धैर्य की ताकीद की , और एक-दूसरे को दया की ताकीद की
M.Farooq-M.Ahmed 90:17
18
वही लोग है सौभाग्यशाली
M.Farooq-M.Ahmed 90:18
19
रहे वे लोग जिन्होंने हमारी आयातों का इनकार किया, वे दुर्भाग्यशाली लोग है
M.Farooq-M.Ahmed 90:19
20
उनपर आग होगी, जिसे बन्द कर दिया गया होगा
M.Farooq-M.Ahmed 90:20
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