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M.Farooq-M.Ahmed

M.Farooq-M.Ahmed
M.Farooq-M.Ahmed meali ile okumaya başla
Fecr 1 / 30
1
साक्षी है उषाकाल,
M.Farooq-M.Ahmed 89:1
2
साक्षी है दस रातें,
M.Farooq-M.Ahmed 89:2
3
साक्षी है युग्म और अयुग्म,
M.Farooq-M.Ahmed 89:3
4
साक्षी है रात जब वह विदा हो रही हो
M.Farooq-M.Ahmed 89:4
5
क्या इसमें बुद्धिमान के लिए बड़ी गवाही है?
M.Farooq-M.Ahmed 89:5
6
क्या तुमने देखा नहीं कि तुम्हारे रब ने क्या किया आद के साथ,
M.Farooq-M.Ahmed 89:6
7
स्तम्भों वाले 'इरम' के साथ?
M.Farooq-M.Ahmed 89:7
8
वे ऐसे थे जिनके सदृश बस्तियों में पैदा नहीं हुए
M.Farooq-M.Ahmed 89:8
9
और समूद के साथ, जिन्होंने घाटी में चट्टाने तराशी थी,
M.Farooq-M.Ahmed 89:9
10
और मेखोवाले फ़िरऔन के साथ?
M.Farooq-M.Ahmed 89:10
11
वे लोग कि जिन्होंने देशो में सरकशी की,
M.Farooq-M.Ahmed 89:11
12
और उनमें बहुत बिगाड़ पैदा किया
M.Farooq-M.Ahmed 89:12
13
अततः तुम्हारे रब ने उनपर यातना का कोड़ा बरसा दिया
M.Farooq-M.Ahmed 89:13
14
निस्संदेह तुम्हारा रब घात में रहता है
M.Farooq-M.Ahmed 89:14
15
किन्तु मनुष्य का हाल यह है कि जब उसका रब इस प्रकार उसकी परीक्षा करता है कि उसे प्रतिष्ठा और नेमत प्रदान करता है, तो वह कहता है, "मेरे रब ने मुझे प्रतिष्ठित किया।"
M.Farooq-M.Ahmed 89:15
16
किन्तु जब कभी वह उसकी परीक्षा इस प्रकार करता है कि उसकी रोज़ी नपी-तुली कर देता है, तो वह कहता है, "मेरे रब ने मेरा अपमान किया।"
M.Farooq-M.Ahmed 89:16
17
कदापि नहीं, बल्कि तुम अनाथ का सम्मान नहीं करते,
M.Farooq-M.Ahmed 89:17
18
और न मुहताज को खिलान पर एक-दूसरे को उभारते हो,
M.Farooq-M.Ahmed 89:18
19
और सारी मीरास समेटकर खा जाते हो,
M.Farooq-M.Ahmed 89:19
20
और धन से उत्कट प्रेम रखते हो
M.Farooq-M.Ahmed 89:20
21
कुछ नहीं, जब धरती कूट-कूटकर चुर्ण-विचुर्ण कर दी जाएगी,
M.Farooq-M.Ahmed 89:21
22
और तुम्हारा रब और फ़रिश्ता (बन्दों की) एक-एक पंक्ति के पास आएगा,
M.Farooq-M.Ahmed 89:22
23
और जहन्नम को उस दिन लाया जाएगा, उस दिन मनुष्य चेतेगा, किन्तु कहाँ है उसके लिए लाभप्रद उस समय का चेतना?
M.Farooq-M.Ahmed 89:23
24
वह कहेगा, "ऐ काश! मैंने अपने जीवन के लिए कुछ करके आगे भेजा होता।"
M.Farooq-M.Ahmed 89:24
25
फिर उस दिन कोई नहीं जो उसकी जैसी यातना दे,
M.Farooq-M.Ahmed 89:25
26
और कोई नहीं जो उसकी जकड़बन्द की तरह बाँधे
M.Farooq-M.Ahmed 89:26
27
ऐ संतुष्ट आत्मा!
M.Farooq-M.Ahmed 89:27
28
लौट अपने रब की ओर, इस तरह कि तू उससे राज़ी है वह तुझसे राज़ी है। अतः मेरे बन्दों में सम्मिलित हो जा। -
M.Farooq-M.Ahmed 89:28
29
अतः मेरे बन्दों में सम्मिलित हो जा
M.Farooq-M.Ahmed 89:29
30
और प्रवेश कर मेरी जन्नत में।"
M.Farooq-M.Ahmed 89:30
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