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M.Farooq-M.Ahmed

M.Farooq-M.Ahmed
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Gaşiye 1 / 26
1
क्या तुम्हें उस छा जानेवाली की ख़बर पहुँची है?
M.Farooq-M.Ahmed 88:1
2
उस दिन कितने ही चेहरे गिरे हुए होंगे,
M.Farooq-M.Ahmed 88:2
3
कठिन परिश्रम में पड़े, थके-हारे
M.Farooq-M.Ahmed 88:3
4
दहकती आग में प्रवेश करेंगे
M.Farooq-M.Ahmed 88:4
5
खौलते हुए स्रोत से पिएँगे,
M.Farooq-M.Ahmed 88:5
6
उनके लिए कोई खाना न होगा सिवाय एक प्रकार के ज़री के,
M.Farooq-M.Ahmed 88:6
7
जो न पुष्ट करे और न भूख मिटाए
M.Farooq-M.Ahmed 88:7
8
उस दिन कितने ही चेहरे प्रफुल्लित और सौम्य होंगे,
M.Farooq-M.Ahmed 88:8
9
अपने प्रयास पर प्रसन्न,
M.Farooq-M.Ahmed 88:9
10
उच्च जन्नत में,
M.Farooq-M.Ahmed 88:10
11
जिसमें कोई व्यर्थ बात न सुनेंगे
M.Farooq-M.Ahmed 88:11
12
उसमें स्रोत प्रवाहित होगा,
M.Farooq-M.Ahmed 88:12
13
उसमें ऊँची-ऊँची मसनदें होगी,
M.Farooq-M.Ahmed 88:13
14
प्याले ढंग से रखे होंगे,
M.Farooq-M.Ahmed 88:14
15
क्रम से गाव तकिए लगे होंगे,
M.Farooq-M.Ahmed 88:15
16
और हर ओर क़ालीने बिछी होंगी
M.Farooq-M.Ahmed 88:16
17
फिर क्या वे ऊँट की ओर नहीं देखते कि कैसा बनाया गया?
M.Farooq-M.Ahmed 88:17
18
और आकाश की ओर कि कैसा ऊँचा किया गया?
M.Farooq-M.Ahmed 88:18
19
और पहाड़ो की ओर कि कैसे खड़े किए गए?
M.Farooq-M.Ahmed 88:19
20
और धरती की ओर कि कैसी बिछाई गई?
M.Farooq-M.Ahmed 88:20
21
अच्छा तो नसीहत करो! तुम तो बस एक नसीहत करनेवाले हो
M.Farooq-M.Ahmed 88:21
22
तुम उनपर कोई दरोग़ा नही हो
M.Farooq-M.Ahmed 88:22
23
किन्तु जिस किसी ने मुँह फेरा और इनकार किया,
M.Farooq-M.Ahmed 88:23
24
तो अल्लाह उसे बड़ी यातना देगा
M.Farooq-M.Ahmed 88:24
25
निस्संदेह हमारी ओर ही है उनका लौटना,
M.Farooq-M.Ahmed 88:25
26
फिर हमारे ही ज़िम्मे है उनका हिसाब लेना
M.Farooq-M.Ahmed 88:26
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