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M.Farooq-M.Ahmed

M.Farooq-M.Ahmed
M.Farooq-M.Ahmed meali ile okumaya başla
Ala 1 / 19
1
तसबीह करो, अपने सर्वाच्च रब के नाम की,
M.Farooq-M.Ahmed 87:1
2
जिसने पैदा किया, फिर ठीक-ठाक किया,
M.Farooq-M.Ahmed 87:2
3
जिसने निर्धारित किया, फिर मार्ग दिखाया,
M.Farooq-M.Ahmed 87:3
4
जिसने वनस्पति उगाई,
M.Farooq-M.Ahmed 87:4
5
फिर उसे ख़ूब घना और हरा-भरा कर दिया
M.Farooq-M.Ahmed 87:5
6
हम तुम्हें पढ़ा देंगे, फिर तुम भूलोगे नहीं
M.Farooq-M.Ahmed 87:6
7
बात यह है कि अल्लाह की इच्छा ही क्रियान्वित है। निश्चय ही वह जानता है खुले को भी और उसे भी जो छिपा रहे
M.Farooq-M.Ahmed 87:7
8
हम तुम्हें सहज ढंग से उस चीज़ की पात्र बना देंगे जो सहज एवं मृदुल (आरामदायक) है
M.Farooq-M.Ahmed 87:8
9
अतः नसीहत करो, यदि नसीहत लाभप्रद हो!
M.Farooq-M.Ahmed 87:9
10
नसीहत हासिल कर लेगा जिसको डर होगा,
M.Farooq-M.Ahmed 87:10
11
किन्तु उससे कतराएगा वह अत्यन्त दुर्भाग्यवाला,
M.Farooq-M.Ahmed 87:11
12
जो बड़ी आग में पड़ेगा,
M.Farooq-M.Ahmed 87:12
13
फिर वह उसमें न मरेगा न जिएगा
M.Farooq-M.Ahmed 87:13
14
सफल हो गया वह जिसने अपने आपको निखार लिया,
M.Farooq-M.Ahmed 87:14
15
और अपने रब के नाम का स्मरण किया, अतः नमाज़ अदा की
M.Farooq-M.Ahmed 87:15
16
नहीं, बल्कि तुम तो सांसारिक जीवन को प्राथमिकता देते हो,
M.Farooq-M.Ahmed 87:16
17
हालाँकि आख़िरत अधिक उत्तम और शेष रहनेवाली है
M.Farooq-M.Ahmed 87:17
18
निस्संदेह यही बात पहले की किताबों में भी है;
M.Farooq-M.Ahmed 87:18
19
इबराईम और मूसा की किताबों में
M.Farooq-M.Ahmed 87:19
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