1
साक्षी है आकाश, और रात में प्रकट होनेवाला -
2
और तुम क्या जानो कि रात में प्रकट होनेवाला क्या है?
4
कि हर एक व्यक्ति पर एक निगरानी करनेवाला नियुक्त है
5
अतः मनुष्य को चाहिए कि देखे कि वह किस चीज़ से पैदा किया गया है
6
एक उछलते पानी से पैदा किया गया है,
7
जो पीठ और पसलियों के मध्य से निकलता है
8
निश्चय ही वह उसके लौटा देने की सामर्थ्य रखता है
9
जिस दिन छिपी चीज़ें परखी जाएँगी,
10
तो उस समय उसके पास न तो अपनी कोई शक्ति होगी और न कोई सहायक
11
साक्षी है आवर्तन (उलट-फेर) वाला आकाश,
14
वह कोई हँसी-मज़ाक नही है
16
और मैं भी एक चाल चल रहा हूँ
17
अत मुहलत दे दो उन इनकार करनेवालों को; मुहलत दे दो उन्हें थोड़ी-सी