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M.Farooq-M.Ahmed

M.Farooq-M.Ahmed
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Tarık 1 / 17
1
साक्षी है आकाश, और रात में प्रकट होनेवाला -
M.Farooq-M.Ahmed 86:1
2
और तुम क्या जानो कि रात में प्रकट होनेवाला क्या है?
M.Farooq-M.Ahmed 86:2
3
दमकता हुआ तारा! -
M.Farooq-M.Ahmed 86:3
4
कि हर एक व्यक्ति पर एक निगरानी करनेवाला नियुक्त है
M.Farooq-M.Ahmed 86:4
5
अतः मनुष्य को चाहिए कि देखे कि वह किस चीज़ से पैदा किया गया है
M.Farooq-M.Ahmed 86:5
6
एक उछलते पानी से पैदा किया गया है,
M.Farooq-M.Ahmed 86:6
7
जो पीठ और पसलियों के मध्य से निकलता है
M.Farooq-M.Ahmed 86:7
8
निश्चय ही वह उसके लौटा देने की सामर्थ्य रखता है
M.Farooq-M.Ahmed 86:8
9
जिस दिन छिपी चीज़ें परखी जाएँगी,
M.Farooq-M.Ahmed 86:9
10
तो उस समय उसके पास न तो अपनी कोई शक्ति होगी और न कोई सहायक
M.Farooq-M.Ahmed 86:10
11
साक्षी है आवर्तन (उलट-फेर) वाला आकाश,
M.Farooq-M.Ahmed 86:11
12
और फट जानेवाली धरती
M.Farooq-M.Ahmed 86:12
13
वह दो-टूक बात है,
M.Farooq-M.Ahmed 86:13
14
वह कोई हँसी-मज़ाक नही है
M.Farooq-M.Ahmed 86:14
15
वे एक चाल चल रहे है,
M.Farooq-M.Ahmed 86:15
16
और मैं भी एक चाल चल रहा हूँ
M.Farooq-M.Ahmed 86:16
17
अत मुहलत दे दो उन इनकार करनेवालों को; मुहलत दे दो उन्हें थोड़ी-सी
M.Farooq-M.Ahmed 86:17
Tarık suresi tamamlandı