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M.Farooq-M.Ahmed

M.Farooq-M.Ahmed
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İnşikak 1 / 25
1
जबकि आकाश फट जाएगा,
M.Farooq-M.Ahmed 84:1
2
और वह अपने रब की सुनेगा, और उसे यही चाहिए भी
M.Farooq-M.Ahmed 84:2
3
जब धरती फैला दी जाएगी
M.Farooq-M.Ahmed 84:3
4
और जो कुछ उसके भीतर है उसे बाहर डालकर खाली हो जाएगी
M.Farooq-M.Ahmed 84:4
5
और वह अपने रब की सुनेगी, और उसे यही चाहिए भी
M.Farooq-M.Ahmed 84:5
6
ऐ मनुष्य! तू मशक़्क़त करता हुआ अपने रब ही की ओर खिंचा चला जा रहा है और अन्ततः उससे मिलने वाला है
M.Farooq-M.Ahmed 84:6
7
फिर जिस किसी को उसका कर्म-पत्र उसके दाहिने हाथ में दिया गया,
M.Farooq-M.Ahmed 84:7
8
तो उससे आसान, सरसरी हिसाब लिया जाएगा
M.Farooq-M.Ahmed 84:8
9
और वह अपने लोगों की ओर ख़ुश-ख़ुश पलटेगा
M.Farooq-M.Ahmed 84:9
10
और रह वह व्यक्ति जिसका कर्म-पत्र (उसके बाएँ हाथ में) उसकी पीठ के पीछे से दिया गया,
M.Farooq-M.Ahmed 84:10
11
तो वह विनाश (मृत्यु) को पुकारेगा,
M.Farooq-M.Ahmed 84:11
12
और दहकती आग में जा पड़ेगा
M.Farooq-M.Ahmed 84:12
13
वह अपने लोगों में मग्न था,
M.Farooq-M.Ahmed 84:13
14
उसने यह समझ रखा था कि उसे कभी पलटना नहीं है
M.Farooq-M.Ahmed 84:14
15
क्यों नहीं, निश्चय ही उसका रब तो उसे देख रहा था!
M.Farooq-M.Ahmed 84:15
16
अतः कुछ नहीं, मैं क़सम खाता हूँ सांध्य-लालिमा की,
M.Farooq-M.Ahmed 84:16
17
और रात की और उसके समेट लेने की,
M.Farooq-M.Ahmed 84:17
18
और चन्द्रमा की जबकि वह पूर्ण हो जाता है,
M.Farooq-M.Ahmed 84:18
19
निश्चय ही तुम्हें मंजिल पर मंजिल चढ़ना है
M.Farooq-M.Ahmed 84:19
20
फिर उन्हें क्या हो गया है कि ईमान नहीं लाते?
M.Farooq-M.Ahmed 84:20
21
और जब उन्हें कुरआन पढ़कर सुनाया जाता है तो सजदे में नहीं गिर पड़ते?
M.Farooq-M.Ahmed 84:21
22
नहीं, बल्कि इनकार करनेवाले तो झुठलाते है,
M.Farooq-M.Ahmed 84:22
23
हालाँकि जो कुछ वे अपने अन्दर एकत्र कर रहे है, अल्लाह उसे भली-भाँति जानता है
M.Farooq-M.Ahmed 84:23
24
अतः उन्हें दुखद यातना की मंगल सूचना दे दो
M.Farooq-M.Ahmed 84:24
25
अलबत्ता जो लोग ईमान लाए और उन्होंने अच्छे कर्म किए उनके लिए कभी न समाप्त॥ होनेवाला प्रतिदान है
M.Farooq-M.Ahmed 84:25
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