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M.Farooq-M.Ahmed

M.Farooq-M.Ahmed
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Mutaffifın 1 / 36
1
तबाही है घटानेवालों के लिए,
M.Farooq-M.Ahmed 83:1
2
जो नापकर लोगों पर नज़र जमाए हुए लेते हैं तो पूरा-पूरा लेते हैं,
M.Farooq-M.Ahmed 83:2
3
किन्तु जब उन्हें नापकर या तौलकर देते हैं तो घटाकर देते हैं
M.Farooq-M.Ahmed 83:3
4
क्या वे समझते नहीं कि उन्हें (जीवित होकर) उठना है,
M.Farooq-M.Ahmed 83:4
5
एक भारी दिन के लिए,
M.Farooq-M.Ahmed 83:5
6
जिस दिन लोग सारे संसार के रब के सामने खड़े होंगे?
M.Farooq-M.Ahmed 83:6
7
कुछ नहीं, निश्चय ही दुराचारियों का काग़ज 'सिज्जीन' में है
M.Farooq-M.Ahmed 83:7
8
तुम्हें क्या मालूम कि 'सिज्जीन' क्या हैं?
M.Farooq-M.Ahmed 83:8
9
मुहर लगा हुआ काग़ज
M.Farooq-M.Ahmed 83:9
10
तबाही है उस दिन झुठलाने-वालों की,
M.Farooq-M.Ahmed 83:10
11
जो बदले के दिन को झुठलाते है
M.Farooq-M.Ahmed 83:11
12
और उसे तो बस प्रत्येक वह क्यक्ति ही झूठलाता है जो सीमा का उल्लंघन करनेवाला, पापी है
M.Farooq-M.Ahmed 83:12
13
जब हमारी आयतें उसे सुनाई जाती है तो कहता है, "ये तो पहले की कहानियाँ है।"
M.Farooq-M.Ahmed 83:13
14
कुछ नहीं, बल्कि जो कुछ वे कमाते रहे है वह उनके दिलों पर चढ़ गया है
M.Farooq-M.Ahmed 83:14
15
कुछ नहीं, अवश्य ही वे उस दिन अपने रब से ओट में होंगे,
M.Farooq-M.Ahmed 83:15
16
फिर वे भड़कती आग में जा पड़ेगे
M.Farooq-M.Ahmed 83:16
17
फिर कहा जाएगा, "यह वही है जिस तुम झुठलाते थे"
M.Farooq-M.Ahmed 83:17
18
कुछ नही, निस्संदेह वफ़ादार लोगों का काग़ज़ 'इल्लीयीन' (उच्च श्रेणी के लोगों) में है।-
M.Farooq-M.Ahmed 83:18
19
और तुम क्या जानो कि 'इल्लीयीन' क्या है? -
M.Farooq-M.Ahmed 83:19
20
लिखा हुआ रजिस्टर
M.Farooq-M.Ahmed 83:20
21
जिसे देखने के लिए सामीप्य प्राप्त लोग उपस्थित होंगे,
M.Farooq-M.Ahmed 83:21
22
निस्संदेह अच्छे लोग नेमतों में होंगे,
M.Farooq-M.Ahmed 83:22
23
ऊँची मसनदों पर से देख रहे होंगे
M.Farooq-M.Ahmed 83:23
24
उनके चहरों से तुम्हें नेमतों की ताज़गी और आभा को बोध हो रहा होगा,
M.Farooq-M.Ahmed 83:24
25
उन्हें मुहरबंद विशुद्ध पेय पिलाया जाएगा,
M.Farooq-M.Ahmed 83:25
26
मुहर उसकी मुश्क ही होगी - जो लोग दूसरी पर बाज़ी ले जाना चाहते हो वे इस चीज़ को प्राप्त करने में बाज़ी ले जाने का प्रयास करे -
M.Farooq-M.Ahmed 83:26
27
और उसमें 'तसनीम' का मिश्रण होगा,
M.Farooq-M.Ahmed 83:27
28
हाल यह है कि वह एक स्रोत है, जिसपर बैठकर सामीप्य प्राप्त लोग पिएँगे
M.Farooq-M.Ahmed 83:28
29
जो अपराधी है वे ईमान लानेवालों पर हँसते थे,
M.Farooq-M.Ahmed 83:29
30
और जब उनके पास से गुज़रते तो आपस में आँखों और भौंहों से इशारे करते थे,
M.Farooq-M.Ahmed 83:30