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M.Farooq-M.Ahmed

M.Farooq-M.Ahmed
M.Farooq-M.Ahmed meali ile okumaya başla
Abese 1 / 42
1
उसने त्योरी चढ़ाई और मुँह फेर लिया,
M.Farooq-M.Ahmed 80:1
2
इस कारण कि उसके पास अन्धा आ गया।
M.Farooq-M.Ahmed 80:2
3
और तुझे क्या मालूम शायद वह स्वयं को सँवारता-निखारता हो
M.Farooq-M.Ahmed 80:3
4
या नसीहत हासिल करता हो तो नसीहत उसके लिए लाभदायक हो?
M.Farooq-M.Ahmed 80:4
5
रहा वह व्यक्ति जो धनी हो गया ह
M.Farooq-M.Ahmed 80:5
6
तू उसके पीछे पड़ा है -
M.Farooq-M.Ahmed 80:6
7
हालाँकि वह अपने को न निखारे तो तुझपर कोई ज़िम्मेदारी नहीं आती -
M.Farooq-M.Ahmed 80:7
8
और रहा वह व्यक्ति जो स्वयं ही तेरे पास दौड़ता हुआ आया,
M.Farooq-M.Ahmed 80:8
9
और वह डरता भी है,
M.Farooq-M.Ahmed 80:9
10
तो तू उससे बेपरवाई करता है
M.Farooq-M.Ahmed 80:10
11
कदापि नहीं, वे (आयतें) तो महत्वपूर्ण नसीहत है -
M.Farooq-M.Ahmed 80:11
12
तो जो चाहे उसे याद कर ले -
M.Farooq-M.Ahmed 80:12
13
पवित्र पन्नों में अंकित है,
M.Farooq-M.Ahmed 80:13
14
प्रतिष्ठि्त, उच्च,
M.Farooq-M.Ahmed 80:14
15
ऐसे कातिबों के हाथों में रहा करते है
M.Farooq-M.Ahmed 80:15
16
जो प्रतिष्ठित और नेक है
M.Farooq-M.Ahmed 80:16
17
विनष्ट हुआ मनुष्य! कैसा अकृतज्ञ है!
M.Farooq-M.Ahmed 80:17
18
उसको किस चीज़ से पैदा किया?
M.Farooq-M.Ahmed 80:18
19
तनिक-सी बूँद से उसको पैदा किया, तो उसके लिए एक अंदाजा ठहराया,
M.Farooq-M.Ahmed 80:19
20
फिर मार्ग को देखो, उसे सुगम कर दिया,
M.Farooq-M.Ahmed 80:20
21
फिर उसे मृत्यु दी और क्रब में उसे रखवाया,
M.Farooq-M.Ahmed 80:21
22
फिर जब चाहेगा उसे (जीवित करके) उठा खड़ा करेगा। -
M.Farooq-M.Ahmed 80:22
23
कदापि नहीं, उसने उसको पूरा नहीं किया जिसका आदेश अल्लाह ने उसे दिया है
M.Farooq-M.Ahmed 80:23
24
अतः मनुष्य को चाहिए कि अपने भोजन को देखे,
M.Farooq-M.Ahmed 80:24
25
कि हमने ख़ूब पानी बरसाया,
M.Farooq-M.Ahmed 80:25
26
फिर धरती को विशेष रूप से फाड़ा,
M.Farooq-M.Ahmed 80:26
27
फिर हमने उसमें उगाए अनाज,
M.Farooq-M.Ahmed 80:27
28
और अंगूर और तरकारी,
M.Farooq-M.Ahmed 80:28
29
और ज़ैतून और खजूर,
M.Farooq-M.Ahmed 80:29
30
और घने बाग़,
M.Farooq-M.Ahmed 80:30