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M.Farooq-M.Ahmed

M.Farooq-M.Ahmed
M.Farooq-M.Ahmed meali ile okumaya başla
Naziat 1 / 46
1
गवाह है वे (हवाएँ) जो ज़ोर से उखाड़ फैंके,
M.Farooq-M.Ahmed 79:1
2
और गवाह है वे (हवाएँ) जो नर्मी के साथ चलें,
M.Farooq-M.Ahmed 79:2
3
और गवाह है वे जो वायुमंडल में तैरें,
M.Farooq-M.Ahmed 79:3
4
फिर एक-दूसरे से अग्रसर हों,
M.Farooq-M.Ahmed 79:4
5
और मामले की तदबीर करें
M.Farooq-M.Ahmed 79:5
6
जिस दिन हिला डालेगी हिला डालनेवाले घटना,
M.Farooq-M.Ahmed 79:6
7
उसके पीछ घटित होगी दूसरी (घटना)
M.Farooq-M.Ahmed 79:7
8
कितने ही दिल उस दिन काँप रहे होंगे,
M.Farooq-M.Ahmed 79:8
9
उनकी निगाहें झुकी होंगी
M.Farooq-M.Ahmed 79:9
10
वे कहते है, "क्या वास्तव में हम पहली हालत में फिर लौटाए जाएँगे?
M.Farooq-M.Ahmed 79:10
11
क्या जब हम खोखली गलित हड्डियाँ हो चुके होंगे?"
M.Farooq-M.Ahmed 79:11
12
वे कहते है, "तब तो लौटना बड़े ही घाटे का होगा।"
M.Farooq-M.Ahmed 79:12
13
वह तो बस एक ही झिड़की होगी,
M.Farooq-M.Ahmed 79:13
14
फिर क्या देखेंगे कि वे एक समतल मैदान में उपस्थित है
M.Farooq-M.Ahmed 79:14
15
क्या तुम्हें मूसा की ख़बर पहुँची है?
M.Farooq-M.Ahmed 79:15
16
जबकि उसके रब ने पवित्र घाटी 'तुवा' में उसे पुकारा था
M.Farooq-M.Ahmed 79:16
17
कि "फ़िरऔन के पास जाओ, उसने बहुत सिर उठा रखा है
M.Farooq-M.Ahmed 79:17
18
और कहो, क्या तू यह चाहता है कि स्वयं को पाक-साफ़ कर ले,
M.Farooq-M.Ahmed 79:18
19
और मैं तेरे रब की ओर तेरा मार्गदर्शन करूँ कि तु (उससे) डरे?
M.Farooq-M.Ahmed 79:19
20
फिर उसने (मूसा ने) उसको बड़ी निशानी दिखाई,
M.Farooq-M.Ahmed 79:20
21
किन्तु उसने झुठला दिया और कहा न माना,
M.Farooq-M.Ahmed 79:21
22
फिर सक्रियता दिखाते हुए पलटा,
M.Farooq-M.Ahmed 79:22
23
फिर (लोगों को) एकत्र किया और पुकारकर कहा,
M.Farooq-M.Ahmed 79:23
24
मैं तुम्हारा उच्चकोटि का स्वामी हूँ!
M.Farooq-M.Ahmed 79:24
25
अन्ततः अल्लाह ने उसे आख़िरत और दुनिया की शिक्षाप्रद यातना में पकड़ लिया
M.Farooq-M.Ahmed 79:25
26
निस्संदेह इसमें उस व्यक्ति के लिए बड़ी शिक्षा है जो डरे!
M.Farooq-M.Ahmed 79:26
27
क्या तुम्हें पैदा करना अधिक कठिन कार्य है या आकाश को? अल्लाह ने उसे बनाया,
M.Farooq-M.Ahmed 79:27
28
उसकी ऊँचाई को ख़ूब ऊँचा करके उसे ठीक-ठाक किया;
M.Farooq-M.Ahmed 79:28
29
और उसकी रात को अन्धकारमय बनाया और उसका दिवस-प्रकाश प्रकट किया
M.Farooq-M.Ahmed 79:29
30
और धरती को देखो! इसके पश्चात उसे फैलाया;
M.Farooq-M.Ahmed 79:30