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M.Farooq-M.Ahmed

M.Farooq-M.Ahmed
M.Farooq-M.Ahmed meali ile okumaya başla
Müddessir 1 / 56
1
ऐ ओढ़ने लपेटनेवाले!
M.Farooq-M.Ahmed 74:1
2
उठो, और सावधान करने में लग जाओ
M.Farooq-M.Ahmed 74:2
3
और अपने रब की बड़ाई ही करो
M.Farooq-M.Ahmed 74:3
4
अपने दामन को पाक रखो
M.Farooq-M.Ahmed 74:4
5
और गन्दगी से दूर ही रहो
M.Farooq-M.Ahmed 74:5
6
अपनी कोशिशों को अधिक समझकर उसके क्रम को भंग न करो
M.Farooq-M.Ahmed 74:6
7
और अपने रब के लिए धैर्य ही से काम लो
M.Farooq-M.Ahmed 74:7
8
जब सूर में फूँक मारी जाएगी
M.Farooq-M.Ahmed 74:8
9
तो जिस दिन ऐसा होगा, वह दिन बड़ा ही कठोर होगा,
M.Farooq-M.Ahmed 74:9
10
इनकार करनेवालो पर आसान न होगा
M.Farooq-M.Ahmed 74:10
11
छोड़ दो मुझे और उसको जिसे मैंने अकेला पैदा किया,
M.Farooq-M.Ahmed 74:11
12
और उसे माल दिया दूर तक फैला हुआ,
M.Farooq-M.Ahmed 74:12
13
और उसके पास उपस्थित रहनेवाले बेटे दिए,
M.Farooq-M.Ahmed 74:13
14
और मैंने उसके लिए अच्छी तरह जीवन-मार्ग समतल किया
M.Farooq-M.Ahmed 74:14
15
फिर वह लोभ रखता है कि मैं उसके लिए और अधिक दूँगा
M.Farooq-M.Ahmed 74:15
16
कदापि नहीं, वह हमारी आयतों का दुश्मन है,
M.Farooq-M.Ahmed 74:16
17
शीघ्र ही मैं उसे घेरकर कठिन चढ़ाई चढ़वाऊँगा
M.Farooq-M.Ahmed 74:17
18
उसने सोचा और अटकल से एक बात बनाई
M.Farooq-M.Ahmed 74:18
19
तो विनष्ट हो, कैसी बात बनाई!
M.Farooq-M.Ahmed 74:19
20
फिर विनष्ट हो, कैसी बात बनाई!
M.Farooq-M.Ahmed 74:20
21
फिर नज़र दौड़ाई,
M.Farooq-M.Ahmed 74:21
22
फिर त्योरी चढ़ाई और मुँह बनाया,
M.Farooq-M.Ahmed 74:22
23
फिर पीठ फेरी और घमंड किया
M.Farooq-M.Ahmed 74:23
24
अन्ततः बोला, "यह तो बस एक जादू है, जो पहले से चला आ रहा है
M.Farooq-M.Ahmed 74:24
25
यह तो मात्र मनुष्य की वाणी है।
M.Farooq-M.Ahmed 74:25
26
मैं शीघ्र ही उसे 'सक़र' (जहन्नम की आग) में झोंक दूँगा
M.Farooq-M.Ahmed 74:26
27
और तुम्हें क्या पता की सक़र क्या है?
M.Farooq-M.Ahmed 74:27
28
वह न तरस खाएगी और न छोड़ेगी,
M.Farooq-M.Ahmed 74:28
29
खाल को झुलसा देनेवाली है,
M.Farooq-M.Ahmed 74:29
30
उसपर उन्नीस (कार्यकर्ता) नियुक्त है
M.Farooq-M.Ahmed 74:30