2
उठो, और सावधान करने में लग जाओ
3
और अपने रब की बड़ाई ही करो
5
और गन्दगी से दूर ही रहो
6
अपनी कोशिशों को अधिक समझकर उसके क्रम को भंग न करो
7
और अपने रब के लिए धैर्य ही से काम लो
8
जब सूर में फूँक मारी जाएगी
9
तो जिस दिन ऐसा होगा, वह दिन बड़ा ही कठोर होगा,
10
इनकार करनेवालो पर आसान न होगा
11
छोड़ दो मुझे और उसको जिसे मैंने अकेला पैदा किया,
12
और उसे माल दिया दूर तक फैला हुआ,
13
और उसके पास उपस्थित रहनेवाले बेटे दिए,
14
और मैंने उसके लिए अच्छी तरह जीवन-मार्ग समतल किया
15
फिर वह लोभ रखता है कि मैं उसके लिए और अधिक दूँगा
16
कदापि नहीं, वह हमारी आयतों का दुश्मन है,
17
शीघ्र ही मैं उसे घेरकर कठिन चढ़ाई चढ़वाऊँगा
18
उसने सोचा और अटकल से एक बात बनाई
19
तो विनष्ट हो, कैसी बात बनाई!
20
फिर विनष्ट हो, कैसी बात बनाई!
22
फिर त्योरी चढ़ाई और मुँह बनाया,
23
फिर पीठ फेरी और घमंड किया
24
अन्ततः बोला, "यह तो बस एक जादू है, जो पहले से चला आ रहा है
25
यह तो मात्र मनुष्य की वाणी है।
26
मैं शीघ्र ही उसे 'सक़र' (जहन्नम की आग) में झोंक दूँगा
27
और तुम्हें क्या पता की सक़र क्या है?
28
वह न तरस खाएगी और न छोड़ेगी,
29
खाल को झुलसा देनेवाली है,
30
उसपर उन्नीस (कार्यकर्ता) नियुक्त है
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