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M.Farooq-M.Ahmed

M.Farooq-M.Ahmed
M.Farooq-M.Ahmed meali ile okumaya başla
Hakka 1 / 52
1
होकर रहनेवाली!
M.Farooq-M.Ahmed 69:1
2
क्या है वह होकर रहनेवाली?
M.Farooq-M.Ahmed 69:2
3
और तुम क्या जानो कि क्या है वह होकर रहनेवाली?
M.Farooq-M.Ahmed 69:3
4
समूद और आद ने उस खड़खड़ा देनेवाली (घटना) को झुठलाया,
M.Farooq-M.Ahmed 69:4
5
फिर समूद तो एक हद से बढ़ जानेवाली आपदा से विनष्ट किए गए
M.Farooq-M.Ahmed 69:5
6
और रहे आद, तो वे एक अनियंत्रित प्रचंड वायु से विनष्ट कर दिए गए
M.Farooq-M.Ahmed 69:6
7
अल्लाह ने उसको सात रात और आठ दिन तक उन्मूलन के उद्देश्य से उनपर लगाए रखा। तो लोगों को तुम देखते कि वे उसमें पछाड़े हुए ऐसे पड़े है मानो वे खजूर के जर्जर तने हों
M.Farooq-M.Ahmed 69:7
8
अब क्या तुम्हें उनमें से कोई शेष दिखाई देता है?
M.Farooq-M.Ahmed 69:8
9
और फ़िरऔन ने और उससे पहले के लोगों ने और तलपट हो जानेवाली बस्तियों ने यह ख़ता की
M.Farooq-M.Ahmed 69:9
10
उन्होंने अपने रब के रसूल की अवज्ञा की तो उसने उन्हें ऐसी पकड़ में ले लिया जो बड़ी कठोर थी
M.Farooq-M.Ahmed 69:10
11
जब पानी उमड़ आया तो हमने तुम्हें प्रवाहित नौका में सवार किया;
M.Farooq-M.Ahmed 69:11
12
ताकि उसे तुम्हारे लिए हम शिक्षाप्रद यादगार बनाएँ और याद रखनेवाले कान उसे सुरक्षित रखें
M.Farooq-M.Ahmed 69:12
13
तो याद रखो जब सूर (नरसिंघा) में एक फूँक मारी जाएगी,
M.Farooq-M.Ahmed 69:13
14
और धरती और पहाड़ों को उठाकर एक ही बार में चूर्ण-विचूर्ण कर दिया जाएगा
M.Farooq-M.Ahmed 69:14
15
तो उस दिन घटित होनेवाली घटना घटित हो जाएगी,
M.Farooq-M.Ahmed 69:15
16
और आकाश फट जाएगा और उस दिन उसका बन्धन ढीला पड़ जाएगा,
M.Farooq-M.Ahmed 69:16
17
और फ़रिश्ते उसके किनारों पर होंगे और उस दिन तुम्हारे रब के सिंहासन को आठ अपने ऊपर उठाए हुए होंगे
M.Farooq-M.Ahmed 69:17
18
उस दिन तुम लोग पेश किए जाओगे, तुम्हारी कोई छिपी बात छिपी न रहेगी
M.Farooq-M.Ahmed 69:18
19
फिर जिस किसी को उसका कर्म-पत्र उसके दाहिने हाथ में दिया गया, तो वह कहेगा, "लो पढ़ो, मेरा कर्म-पत्र!
M.Farooq-M.Ahmed 69:19
20
मैं तो समझता ही था कि मुझे अपना हिसाब मिलनेवाला है।
M.Farooq-M.Ahmed 69:20
21
अतः वह सुख और आनन्दमय जीवन में होगा;
M.Farooq-M.Ahmed 69:21
22
उच्च जन्नत में,
M.Farooq-M.Ahmed 69:22
23
जिसके फलों के गुच्छे झुके होंगे
M.Farooq-M.Ahmed 69:23
24
मज़े से खाओ और पियो उन कर्मों के बदले में जो तुमने बीते दिनों में किए है
M.Farooq-M.Ahmed 69:24
25
और रहा वह क्यक्ति जिसका कर्म-पत्र उसके बाएँ हाथ में दिया गया, वह कहेगा, "काश, मेरा कर्म-पत्र मुझे न दिया जाता
M.Farooq-M.Ahmed 69:25
26
और मैं न जानता कि मेरा हिसाब क्या है!
M.Farooq-M.Ahmed 69:26
27
ऐ काश, वह (मृत्यु) समाप्त करनेवाली होती!
M.Farooq-M.Ahmed 69:27
28
मेरा माल मेरे कुछ काम न आया,
M.Farooq-M.Ahmed 69:28
29
मेरा ज़ोर (सत्ता) मुझसे जाता रहा!
M.Farooq-M.Ahmed 69:29
30
पकड़ो उसे और उसकी गरदन में तौक़ डाल दो,
M.Farooq-M.Ahmed 69:30