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M.Farooq-M.Ahmed

M.Farooq-M.Ahmed
M.Farooq-M.Ahmed meali ile okumaya başla
Rahman 1 / 78
1
रहमान ने
M.Farooq-M.Ahmed 55:1
2
क़ुरआन सिखाया;
M.Farooq-M.Ahmed 55:2
3
उसी ने मनुष्य को पैदा किया;
M.Farooq-M.Ahmed 55:3
4
उसे बोलना सिखाया;
M.Farooq-M.Ahmed 55:4
5
सूर्य और चन्द्रमा एक हिसाब के पाबन्द है;
M.Farooq-M.Ahmed 55:5
6
और तारे और वृक्ष सजदा करते है;
M.Farooq-M.Ahmed 55:6
7
उसने आकाश को ऊँचा किया और संतुलन स्थापित किया -
M.Farooq-M.Ahmed 55:7
8
कि तुम भी तुला में सीमा का उल्लंघन न करो
M.Farooq-M.Ahmed 55:8
9
न्याय के साथ ठीक-ठीक तौलो और तौल में कमी न करो। -
M.Farooq-M.Ahmed 55:9
10
और धरती को उसने सृष्टल प्राणियों के लिए बनाया;
M.Farooq-M.Ahmed 55:10
11
उसमें स्वादिष्ट फल है और खजूर के वृक्ष है, जिनके फल आवरणों में लिपटे हुए है,
M.Farooq-M.Ahmed 55:11
12
और भुसवाले अनाज भी और सुगंधित बेल-बूटा भी
M.Farooq-M.Ahmed 55:12
13
तो तुम दोनों अपने रब की अनुकम्पाओं में से किस-किस को झुठलाओगे?
M.Farooq-M.Ahmed 55:13
14
उसने मनुष्य को ठीकरी जैसी खनखनाती हुए मिट्टी से पैदा किया;
M.Farooq-M.Ahmed 55:14
15
और जिन्न को उसने आग की लपट से पैदा किया
M.Farooq-M.Ahmed 55:15
16
फिर तुम दोनों अपने रब की सामर्थ्यों में से किस-किस को झुठलाओगे?
M.Farooq-M.Ahmed 55:16
17
वह दो पूर्व का रब है और दो पश्चिम का रब भी।
M.Farooq-M.Ahmed 55:17
18
फिर तुम दोनों अपने रब की महानताओं में से किस-किस को झुठलाओगे?
M.Farooq-M.Ahmed 55:18
19
उसने दो समुद्रो को प्रवाहित कर दिया, जो आपस में मिल रहे होते है।
M.Farooq-M.Ahmed 55:19
20
उन दोनों के बीच एक परदा बाधक होता है, जिसका वे अतिक्रमण नहीं करते
M.Farooq-M.Ahmed 55:20
21
तो तुम दोनों अपने रब के चमत्कारों में से किस-किस को झुठलाओगे?
M.Farooq-M.Ahmed 55:21
22
उन (समुद्रों) से मोती और मूँगा निकलता है।
M.Farooq-M.Ahmed 55:22
23
अतः तुम दोनों अपने रब के चमत्कारों में से किस-किस को झुठलाओगे?
M.Farooq-M.Ahmed 55:23
24
उसी के बस में है समुद्र में पहाड़ो की तरह उठे हुए जहाज़
M.Farooq-M.Ahmed 55:24
25
तो तुम दोनों अपने रब की अनुकम्पाओं में से किस-किस को झुठलाओग?
M.Farooq-M.Ahmed 55:25
26
प्रत्येक जो भी इस (धरती) पर है, नाशवान है
M.Farooq-M.Ahmed 55:26
27
किन्तु तुम्हारे रब का प्रतापवान और उदार स्वरूप शेष रहनेवाला है
M.Farooq-M.Ahmed 55:27
28
अतः तुम दोनों अपने रब के चमत्कारों में से किस-किस को झुठलाओगं?
M.Farooq-M.Ahmed 55:28
29
आकाशों और धरती में जो भी है उसी से माँगता है। उसकी नित्य नई शान है
M.Farooq-M.Ahmed 55:29
30
अतः तुम दोनों अपने रब की अनुकम्पाओं में से किस-किस को झुठलाओगे?
M.Farooq-M.Ahmed 55:30