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M.Farooq-M.Ahmed

M.Farooq-M.Ahmed
M.Farooq-M.Ahmed meali ile okumaya başla
Kamer 1 / 55
1
वह घड़ी निकट और लगी और चाँद फट गया;
M.Farooq-M.Ahmed 54:1
2
किन्तु हाल यह है कि यदि वे कोई निशानी देख भी लें तो टाल जाएँगे और कहेंगे, "यह तो जादू है, पहले से चला आ रहा है!"
M.Farooq-M.Ahmed 54:2
3
उन्होंने झुठलाया और अपनी इच्छाओं का अनुसरण किया; किन्तु हर मामले के लिए एक नियत अवधि है।
M.Farooq-M.Ahmed 54:3
4
उनके पास अतीत को ऐसी खबरें आ चुकी है, जिनमें ताड़ना अर्थात पूर्णतः तत्वदर्शीता है।
M.Farooq-M.Ahmed 54:4
5
किन्तु चेतावनियाँ उनके कुछ काम नहीं आ रही है! -
M.Farooq-M.Ahmed 54:5
6
अतः उनसे रुख़ फेर लो - जिस दिन पुकारनेवाला एक अत्यन्त अप्रिय चीज़ की ओर पुकारेगा;
M.Farooq-M.Ahmed 54:6
7
वे अपनी झुकी हुई निगाहों के साथ अपनी क्रबों से निकल रहे होंगे, मानो वे बिखरी हुई टिड्डियाँ है;
M.Farooq-M.Ahmed 54:7
8
दौड़ पड़ने को पुकारनेवाले की ओर। इनकार करनेवाले कहेंगे, "यह तो एक कठिन दिन है!"
M.Farooq-M.Ahmed 54:8
9
उनसे पहले नूह की क़ौम ने भी झुठलाया। उन्होंने हमारे बन्दे को झूठा ठहराया और कहा, "यह तो दीवाना है!" और वह बुरी तरह झिड़का गया
M.Farooq-M.Ahmed 54:9
10
अन्त में उसने अपने रब को पुकारा कि "मैं दबा हुआ हूँ। अब तू बदला ले।"
M.Farooq-M.Ahmed 54:10
11
तब हमने मूसलाधार बरसते हुए पानी से आकाश के द्वार खोल दिए;
M.Farooq-M.Ahmed 54:11
12
और धरती को प्रवाहित स्रोतों में परिवर्तित कर दिया, और सारा पानी उस काम के लिए मिल गया जो नियत हो चुका था
M.Farooq-M.Ahmed 54:12
13
और हमने उसे एक तख़्तों और कीलोंवाली (नौका) पर सवार किया,
M.Farooq-M.Ahmed 54:13
14
जो हमारी निगाहों के सामने चल रही थी - यह बदला था उस व्यक्ति के लिए जिसकी क़द्र नहीं की गई।
M.Farooq-M.Ahmed 54:14
15
हमने उसे एक निशानी बनाकर छोड़ दिया; फिर क्या कोई नसीहत हासिल करनेवाला?
M.Farooq-M.Ahmed 54:15
16
फिर कैसी रही मेरी यातना और मेरे डरावे?
M.Farooq-M.Ahmed 54:16
17
और हमने क़ुरआन को नसीहत के लिए अनुकूल और सहज बना दिया है। फिर क्या है कोई नसीहत करनेवाला?
M.Farooq-M.Ahmed 54:17
18
आद ने भी झुठलाया, फिर कैसी रही मेरी यातना और मेरा डराना?
M.Farooq-M.Ahmed 54:18
19
निश्चय ही हमने एक निरन्तर अशुभ दिन में तेज़ प्रचंड ठंडी हवा भेजी, उसे उनपर मुसल्लत कर दिया, तो वह लोगों को उखाड़ फेंक रही थी
M.Farooq-M.Ahmed 54:19
20
मानो वे उखड़े खजूर के तने हो
M.Farooq-M.Ahmed 54:20
21
फिर कैसी रही मेरी यातना और मेरे डरावे?
M.Farooq-M.Ahmed 54:21
22
और हमने क़ुरआन को नसीहत के लिए अनुकूल और सहज बना दिया है। फिर क्या है कोई नसीहत हासिल करनेवाला?
M.Farooq-M.Ahmed 54:22
23
समूद ने चेतावनियों को झुठलाया;
M.Farooq-M.Ahmed 54:23
24
और कहने लगे, "एक अकेला आदमी, जो हम ही में से है, क्या हम उसके पीछे चलेंगे? तब तो वास्तव में हम गुमराही और दीवानापन में पड़ गए!
M.Farooq-M.Ahmed 54:24
25
क्या हमारे बीच उसी पर अनुस्मृति उतारी है? नहीं, बल्कि वह तो परले दरजे का झूठा, बड़ा आत्मश्लाघी है।
M.Farooq-M.Ahmed 54:25
26
कल को ही वे जान लेंगे कि कौन परले दरजे का झूठा, बड़ा आत्मश्लाघी है।
M.Farooq-M.Ahmed 54:26
27
हम ऊँटनी को उनके लिए परीक्षा के रूप में भेज रहे है। अतः तुम उन्हें देखते जाओ और धैर्य से काम लो
M.Farooq-M.Ahmed 54:27
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और उन्हें सूचित कर दो कि पानी उनके बीच बाँट दिया गया है। हर एक पीने की बारी पर बारीवाला उपस्थित होगा।
M.Farooq-M.Ahmed 54:28
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अन्ततः उन्होंने अपने साथी को पुकारा, तो उसने ज़िम्मा लिया फिर उसने उसकी कूचें काट दी
M.Farooq-M.Ahmed 54:29
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फिर कैसी रही मेरी यातना और मेरे डरावे?
M.Farooq-M.Ahmed 54:30