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M.Farooq-M.Ahmed

M.Farooq-M.Ahmed
M.Farooq-M.Ahmed meali ile okumaya başla
Necm 1 / 62
1
गवाह है तारा, जब वह नीचे को आए
M.Farooq-M.Ahmed 53:1
2
तुम्हारी साथी (मुहम्मह सल्ल॰) न गुमराह हुआ और न बहका;
M.Farooq-M.Ahmed 53:2
3
और न वह अपनी इच्छा से बोलता है;
M.Farooq-M.Ahmed 53:3
4
वह तो बस एक प्रकाशना है, जो की जा रही है
M.Farooq-M.Ahmed 53:4
5
उसे बड़ी शक्तियोंवाले ने सिखाया,
M.Farooq-M.Ahmed 53:5
6
स्थिर रीतिवाले ने।
M.Farooq-M.Ahmed 53:6
7
अतः वह भरपूर हुआ, इस हाल में कि वह क्षितिज के उच्चतम छोर पर है
M.Farooq-M.Ahmed 53:7
8
फिर वह निकट हुआ और उतर गया
M.Farooq-M.Ahmed 53:8
9
अब दो कमानों के बराबर या उससे भी अधिक निकट हो गया
M.Farooq-M.Ahmed 53:9
10
तब उसने अपने बन्दे की ओर प्रकाशना की, जो कुछ प्रकाशना की।
M.Farooq-M.Ahmed 53:10
11
दिल ने कोई धोखा नहीं दिया, जो कुछ उसने देखा;
M.Farooq-M.Ahmed 53:11
12
अब क्या तुम उस चीज़ पर झगड़ते हो, जिसे वह देख रहा है? -
M.Farooq-M.Ahmed 53:12
13
और निश्चय ही वह उसे एक बार और
M.Farooq-M.Ahmed 53:13
14
'सिदरतुल मुन्तहा' (परली सीमा के बेर) के पास उतरते देख चुका है
M.Farooq-M.Ahmed 53:14
15
उसी के निकट 'जन्नतुल मावा' (ठिकानेवाली जन्नत) है। -
M.Farooq-M.Ahmed 53:15
16
जबकि छा रहा था उस बेर पर, जो कुछ छा रहा था
M.Farooq-M.Ahmed 53:16
17
निगाह न तो टेढ़ी हुइ और न हद से आगे बढ़ी
M.Farooq-M.Ahmed 53:17
18
निश्चय ही उसने अपने रब की बड़ी-बड़ी निशानियाँ देखीं
M.Farooq-M.Ahmed 53:18
19
तो क्या तुमने लात और उज़्ज़ा
M.Farooq-M.Ahmed 53:19
20
और तीसरी एक और (देवी) मनात पर विचार किया?
M.Farooq-M.Ahmed 53:20
21
क्या तुम्हारे लिए तो बेटे है उनके लिए बेटियाँ?
M.Farooq-M.Ahmed 53:21
22
तब तो यह बहुत बेढ़ंगा और अन्यायपूर्ण बँटवारा हुआ!
M.Farooq-M.Ahmed 53:22
23
वे तो बस कुछ नाम है जो तुमने और तुम्हारे बाप-दादा ने रख लिए है। अल्लाह ने उनके लिए कोई सनद नहीं उतारी। वे तो केवल अटकल के पीछे चले रहे है और उनके पीछे जो उनके मन की इच्छा होती है। हालाँकि उनके पास उनके रब की ओर से मार्गदर्शन आ चुका है
M.Farooq-M.Ahmed 53:23
24
(क्या उनकी देवियाँ उन्हें लाभ पहुँचा सकती है) या मनुष्य वह कुछ पा लेगा, जिसकी वह कामना करता है?
M.Farooq-M.Ahmed 53:24
25
आख़िरत और दुनिया का मालिक तो अल्लाह ही है
M.Farooq-M.Ahmed 53:25
26
आकाशों में कितने ही फ़रिश्ते है, उनकी सिफ़ारिश कुछ काम नहीं आएगी; यदि काम आ सकती है तो इसके पश्चात ही कि अल्लाह अनुमति दे, जिसे चाहे और पसन्द करे।
M.Farooq-M.Ahmed 53:26
27
जो लोग आख़िरत को नहीं मानते, वे फ़रिश्तों के देवियों के नाम से अभिहित करते है,
M.Farooq-M.Ahmed 53:27
28
हालाँकि इस विषय में उन्हें कोई ज्ञान नहीं। वे केवल अटकल के पीछे चलते है, हालाँकि सत्य से जो लाभ पहुँचता है वह अटकल से कदापि नहीं पहुँच सकता।
M.Farooq-M.Ahmed 53:28
29
अतः तुम उसको ध्यान में न लाओ जो हमारे ज़िक्र से मुँह मोड़ता है और सांसारिक जीवन के सिवा उसने कुछ नहीं चाहा
M.Farooq-M.Ahmed 53:29
30
ऐसे लोगों के ज्ञान की पहुँच बस यहीं तक है। निश्चय ही तुम्हारा रब ही उसे भली-भाँति जानता है जो उसके मार्ग से भटक गया और वही उसे भी भली-भाँति जानता है जिसने सीधा मार्ग अपनाया
M.Farooq-M.Ahmed 53:30