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M.Farooq-M.Ahmed

M.Farooq-M.Ahmed
M.Farooq-M.Ahmed meali ile okumaya başla
Tur 1 / 49
1
गवाह है तूर पर्वत,
M.Farooq-M.Ahmed 52:1
2
और लिखी हुई किताब;
M.Farooq-M.Ahmed 52:2
3
फैले हुए झिल्ली के पन्ने में
M.Farooq-M.Ahmed 52:3
4
और बसा हुआ घर;
M.Farooq-M.Ahmed 52:4
5
और ऊँची छत;
M.Farooq-M.Ahmed 52:5
6
और उफनता समुद्र
M.Farooq-M.Ahmed 52:6
7
कि तेरे रब की यातना अवश्य घटित होकर रहेगी;
M.Farooq-M.Ahmed 52:7
8
जिसे टालनेवाला कोई नहीं;
M.Farooq-M.Ahmed 52:8
9
जिस दिल आकाश बुरी तरह डगमगाएगा;
M.Farooq-M.Ahmed 52:9
10
और पहाड़ चलते-फिरते होंगे;
M.Farooq-M.Ahmed 52:10
11
तो तबाही है उस दिन, झुठलानेवालों के लिए;
M.Farooq-M.Ahmed 52:11
12
जो बात बनाने में लगे हुए खेल रहे है
M.Farooq-M.Ahmed 52:12
13
जिस दिन वे धक्के दे-देकर जहन्नम की ओर ढकेले जाएँगे
M.Farooq-M.Ahmed 52:13
14
(कहा जाएगा), "यही है वह आग जिसे तुम झुठलाते थे
M.Farooq-M.Ahmed 52:14
15
अब भला (बताओ) यह कोई जादू है या तुम्हे सुझाई नहीं देता?
M.Farooq-M.Ahmed 52:15
16
जाओ, झुलसो उसमें! अब धैर्य से काम लो या धैर्य से काम न लो; तुम्हारे लिए बराबर है। तुम वही बदला पा रहे हो, जो तुम करते रहे थे।
M.Farooq-M.Ahmed 52:16
17
निश्चय ही डर रखनेवाले बाग़ों और नेमतों में होंगे
M.Farooq-M.Ahmed 52:17
18
जो कुछ उनके रब ने उन्हें दिया होगा, उसका आनन्द ले रहे होंगे और इस बात से कि उनके रब ने उन्हें भड़कती हुई आग से बचा लिया -
M.Farooq-M.Ahmed 52:18
19
मज़े से खाओ और पियो उन कर्मों के बदले में जो तुम करते रहे हो।
M.Farooq-M.Ahmed 52:19
20
M.Farooq-M.Ahmed 52:20
21
जो लोग ईमान लाए और उनकी सन्तान ने भी ईमान के साथ उसका अनुसरण किया, उनकी सन्तान को भी हम उनसे मिला देंगे, और उनके कर्म में से कुछ भी कम करके उन्हें नहीं देंगे। हर व्यक्ति अपनी कमाई के बदले में बन्धक है
M.Farooq-M.Ahmed 52:21
22
और हम उन्हें मेवे और मांस, जिसकी वे इच्छा करेंगे दिए चले जाएँगे
M.Farooq-M.Ahmed 52:22
23
वे वहाँ आपस में प्याले हाथोंहाथ ले रहे होंगे, जिसमें न कोई बेहूदगी होगी और न गुनाह पर उभारनेवाली कोई बात,
M.Farooq-M.Ahmed 52:23
24
और उनकी सेवा में सुरक्षित मोतियों के सदृश किशोर दौड़ते फिरते होंगे, जो ख़ास उन्हीं (की सेवा) के लिए होंगे
M.Farooq-M.Ahmed 52:24
25
उनमें से कुछ व्यक्ति कुछ व्यक्तियों की ओर हाल पूछते हुए रुख़ करेंगे,
M.Farooq-M.Ahmed 52:25
26
कहेंगे, "निश्चय ही हम पहले अपने घरवालों में डरते रहे है,
M.Farooq-M.Ahmed 52:26
27
अन्ततः अल्लाह ने हमपर एहसास किया और हमें गर्म विषैली वायु की यातना से बचा लिया
M.Farooq-M.Ahmed 52:27
28
इससे पहले हम उसे पुकारते रहे है। निश्चय ही वह सदव्यवहार करनेवाला, अत्यन्त दयावान है।
M.Farooq-M.Ahmed 52:28
29
अतः तुम याद दिलाते रहो। अपने रब की अनुकम्पा से न तुम काहिन (ढोंगी भविष्यवक्ता) हो और न दीवाना
M.Farooq-M.Ahmed 52:29
30
या वे कहते है, "वह कवि है जिसके लिए हम काल-चक्र की प्रतीक्षा कर रहे है?"
M.Farooq-M.Ahmed 52:30