3
फैले हुए झिल्ली के पन्ने में
7
कि तेरे रब की यातना अवश्य घटित होकर रहेगी;
8
जिसे टालनेवाला कोई नहीं;
9
जिस दिल आकाश बुरी तरह डगमगाएगा;
10
और पहाड़ चलते-फिरते होंगे;
11
तो तबाही है उस दिन, झुठलानेवालों के लिए;
12
जो बात बनाने में लगे हुए खेल रहे है
13
जिस दिन वे धक्के दे-देकर जहन्नम की ओर ढकेले जाएँगे
14
(कहा जाएगा), "यही है वह आग जिसे तुम झुठलाते थे
15
अब भला (बताओ) यह कोई जादू है या तुम्हे सुझाई नहीं देता?
16
जाओ, झुलसो उसमें! अब धैर्य से काम लो या धैर्य से काम न लो; तुम्हारे लिए बराबर है। तुम वही बदला पा रहे हो, जो तुम करते रहे थे।
17
निश्चय ही डर रखनेवाले बाग़ों और नेमतों में होंगे
18
जो कुछ उनके रब ने उन्हें दिया होगा, उसका आनन्द ले रहे होंगे और इस बात से कि उनके रब ने उन्हें भड़कती हुई आग से बचा लिया -
19
मज़े से खाओ और पियो उन कर्मों के बदले में जो तुम करते रहे हो।
21
जो लोग ईमान लाए और उनकी सन्तान ने भी ईमान के साथ उसका अनुसरण किया, उनकी सन्तान को भी हम उनसे मिला देंगे, और उनके कर्म में से कुछ भी कम करके उन्हें नहीं देंगे। हर व्यक्ति अपनी कमाई के बदले में बन्धक है
22
और हम उन्हें मेवे और मांस, जिसकी वे इच्छा करेंगे दिए चले जाएँगे
23
वे वहाँ आपस में प्याले हाथोंहाथ ले रहे होंगे, जिसमें न कोई बेहूदगी होगी और न गुनाह पर उभारनेवाली कोई बात,
24
और उनकी सेवा में सुरक्षित मोतियों के सदृश किशोर दौड़ते फिरते होंगे, जो ख़ास उन्हीं (की सेवा) के लिए होंगे
25
उनमें से कुछ व्यक्ति कुछ व्यक्तियों की ओर हाल पूछते हुए रुख़ करेंगे,
26
कहेंगे, "निश्चय ही हम पहले अपने घरवालों में डरते रहे है,
27
अन्ततः अल्लाह ने हमपर एहसास किया और हमें गर्म विषैली वायु की यातना से बचा लिया
28
इससे पहले हम उसे पुकारते रहे है। निश्चय ही वह सदव्यवहार करनेवाला, अत्यन्त दयावान है।
29
अतः तुम याद दिलाते रहो। अपने रब की अनुकम्पा से न तुम काहिन (ढोंगी भविष्यवक्ता) हो और न दीवाना
30
या वे कहते है, "वह कवि है जिसके लिए हम काल-चक्र की प्रतीक्षा कर रहे है?"
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