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M.Farooq-M.Ahmed

M.Farooq-M.Ahmed
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Zariyat 1 / 60
1
गवाह है (हवाएँ) जो गर्द-ग़ुबार उड़ाती फिरती है;
M.Farooq-M.Ahmed 51:1
2
फिर बोझ उठाती है;
M.Farooq-M.Ahmed 51:2
3
फिर नरमी से चलती है;
M.Farooq-M.Ahmed 51:3
4
फिर मामले को अलग-अलग करती है;
M.Farooq-M.Ahmed 51:4
5
निश्चय ही तुमसे जिस चीज़ का वादा किया जाता है, वह सत्य है;
M.Farooq-M.Ahmed 51:5
6
और (कर्मों का) बदला अवश्य सामने आकर रहेगा
M.Farooq-M.Ahmed 51:6
7
गवाह है धारियोंवाला आकाश।
M.Farooq-M.Ahmed 51:7
8
निश्चय ही तुम उस बात में पड़े हुए हो जिनमें कथन भिन्न-भिन्न है
M.Farooq-M.Ahmed 51:8
9
इसमें कोई सरफिरा ही विमुख होता है
M.Farooq-M.Ahmed 51:9
10
मारे जाएँ अटकल दौड़ानेवाले;
M.Farooq-M.Ahmed 51:10
11
जो ग़फ़लत में पड़े हुए हैं भूले हुए
M.Farooq-M.Ahmed 51:11
12
पूछते है, "बदले का दिन कब आएगा?"
M.Farooq-M.Ahmed 51:12
13
जिस दिन वे आग पर तपाए जाएँगे,
M.Farooq-M.Ahmed 51:13
14
चखों मज़ा. अपने फ़ितने (उपद्रव) का! यहीं है जिसके लिए तुम जल्दी मचा रहे थे।
M.Farooq-M.Ahmed 51:14
15
निश्चय ही डर रखनेवाले बाग़ों और स्रोतों में होंगे
M.Farooq-M.Ahmed 51:15
16
जो कुछ उनके रब ने उन्हें दिया, वे उसे ले रहे होंगे। निस्संदेह वे इससे पहले उत्तमकारों में से थे
M.Farooq-M.Ahmed 51:16
17
रातों को थोड़ा ही सोते थे,
M.Farooq-M.Ahmed 51:17
18
और वही प्रातः की घड़ियों में क्षमा की प्रार्थना करते थे
M.Farooq-M.Ahmed 51:18
19
और उनके मालों में माँगनेवाले और धनहीन का हक़ था
M.Farooq-M.Ahmed 51:19
20
और धरती में विश्वास करनेवालों के लिए बहुत-सी निशानियाँ है,
M.Farooq-M.Ahmed 51:20
21
और ,स्वयं तुम्हारे अपने आप में भी। तो क्या तुम देखते नहीं?
M.Farooq-M.Ahmed 51:21
22
और आकाश मे ही तुम्हारी रोज़ी है और वह चीज़ भी जिसका तुमसे वादा किया जा रहा है
M.Farooq-M.Ahmed 51:22
23
अतः सौगन्ध है आकाश और धरती के रब की। निश्चय ही वह सत्य बात है ऐसे ही जैसे तुम बोलते हो
M.Farooq-M.Ahmed 51:23
24
क्या इबराईम के प्रतिष्ठित अतिथियों का वृतान्त तुम तक पहँचा?
M.Farooq-M.Ahmed 51:24
25
जब वे उसके पास आए तो कहा, "सलाम है तुमपर!" उसने भी कहा, "सलाम है आप लोगों पर भी!" (और जी में कहा) "ये तो अपरिचित लोग हैं।"
M.Farooq-M.Ahmed 51:25
26
फिर वह चुपके से अपने घरवालों के पास गया और एक मोटा-ताज़ा बछड़ा (का भूना हुआ मांस) ले आया
M.Farooq-M.Ahmed 51:26
27
और उसे उनके सामने पेश किया। कहा, "क्या आप खाते नहीं?"
M.Farooq-M.Ahmed 51:27
28
फिर उसने दिल में उनसे डर महसूस किया। उन्होंने कहा, "डरिए नहीं।" और उन्होंने उसे एक ज्ञानवान लड़के की मंगल-सूचना दी
M.Farooq-M.Ahmed 51:28
29
इसपर उसकी स्त्री (चकित होकर) आगे बढ़ी और उसने अपना मुँह पीट लिया और कहने लगी, "एक बूढ़ी बाँझ (के यहाँ बच्चा पैदा होगा)!"
M.Farooq-M.Ahmed 51:29
30
उन्होंने कहा, "ऐसी ही तेरे रब ने कहा है। निश्चय ही वह बड़ा तत्वदर्शी, ज्ञानवान है।"
M.Farooq-M.Ahmed 51:30