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M.Farooq-M.Ahmed

M.Farooq-M.Ahmed
M.Farooq-M.Ahmed meali ile okumaya başla
Kaf 1 / 45
1
क़ाफ़॰; गवाह है क़ुरआन मजीद! -
M.Farooq-M.Ahmed 50:1
2
बल्कि उन्हें तो इस बात पर आश्चर्य हुआ कि उनके पास उन्हीं में से एक सावधान करनेवाला आ गया। फिर इनकार करनेवाले कहने लगे, "यह तो आश्चर्य की बात है
M.Farooq-M.Ahmed 50:2
3
क्या जब हम मर जाएँगे और मिट्टी हो जाएँगे (तो फिर हम जीवि होकर पलटेंगे)? यह पलटना तो बहुत दूर की बात है!
M.Farooq-M.Ahmed 50:3
4
हम जानते है कि धरती उनमें जो कुछ कमी करती है और हमारे पास सुरक्षित रखनेवाली एक किताब भी है
M.Farooq-M.Ahmed 50:4
5
बल्कि उन्होंने सत्य को झुठला दिया जब वह उनके पास आया। अतः वे एक उलझन भी बात में पड़े हुए है
M.Farooq-M.Ahmed 50:5
6
अच्छा तो क्या उन्होंने अपने ऊपर आकाश को नहीं देखा, हमने उसे कैसा बनाया और उसे सजाया। और उसमें कोई दरार नहीं
M.Farooq-M.Ahmed 50:6
7
और धरती को हमने फैलाया और उसमे अटल पहाड़ डाल दिए। और हमने उसमें हर प्रकार की सुन्दर चीज़े उगाई,
M.Farooq-M.Ahmed 50:7
8
आँखें खोलने और याद दिलाने के उद्देश्य से, हर बन्दे के लिए जो रुजू करनेवाला हो
M.Farooq-M.Ahmed 50:8
9
और हमने आकाश से बरकतवाला पानी उतारा, फिर उससे बाग़ और फ़सल के अनाज।
M.Farooq-M.Ahmed 50:9
10
और ऊँचे-ऊँचे खजूर के वृक्ष उगाए जिनके गुच्छे तह पर तह होते है,
M.Farooq-M.Ahmed 50:10
11
बन्दों की रोजी के लिए। और हमने उस (पानी) के द्वारा निर्जीव धरती को जीवन प्रदान किया। इसी प्रकार निकलना भी हैं
M.Farooq-M.Ahmed 50:11
12
उनसे पहले नूह की क़ौम, 'अर्-रस' वाले, समूद,
M.Farooq-M.Ahmed 50:12
13
आद, फ़िरऔन , लूत के भाई,
M.Farooq-M.Ahmed 50:13
14
'अल-ऐका' वाले और तुब्बा के लोग भी झुठला चुके है। प्रत्येक ने रसूलों को झुठलाया। अन्ततः मेरी धमकी सत्यापित होकर रही
M.Farooq-M.Ahmed 50:14
15
क्या हम पहली बार पैदा करने से असमर्थ रहे? नहीं, बल्कि वे एक नई सृष्टि के विषय में सन्देह में पड़े है
M.Farooq-M.Ahmed 50:15
16
हमने मनुष्य को पैदा किया है और हम जानते है जो बातें उसके जी में आती है। और हम उससे उसकी गरदन की रग से भी अधिक निकट है
M.Farooq-M.Ahmed 50:16
17
जब दो प्राप्त करनेवाले (फ़रिशते) प्राप्त कर रहे होते है, दाएँ से और बाएँ से वे लगे बैठे होते है
M.Farooq-M.Ahmed 50:17
18
कोई बात उसने कही नहीं कि उसके पास एक निरीक्षक तैयार रहता है
M.Farooq-M.Ahmed 50:18
19
और मौत की बेहोशी ले आई अविश्व नीय चीज़! यही वह चीज़ है जिससे तू कतराता था
M.Farooq-M.Ahmed 50:19
20
और नरसिंघा फूँक दिया गया। यही है वह दिन जिसकी धमकी दी गई थी
M.Farooq-M.Ahmed 50:20
21
हर व्यक्ति इस दशा में आ गया कि उसके साथ एक लानेवाला है और एक गवाही देनेवाला
M.Farooq-M.Ahmed 50:21
22
तू इस चीज़ की ओर से ग़फ़लत में था। अब हमने तुझसे तेरा परदा हटा दिया, तो आज तेरी निगाह बड़ी तेज़ है
M.Farooq-M.Ahmed 50:22
23
उसके साथी ने कहा, "यह है (तेरी सजा)! मेरे पास कुछ (सहायता के लिए) मौजूद नहीं।"
M.Farooq-M.Ahmed 50:23
24
डाल दो, डाल दो, जहन्नम में! हर अकृतज्ञ द्वेष रखने वाले,
M.Farooq-M.Ahmed 50:24
25
भलाई से रोकनेवाले, सीमा का अतिक्रमण करनेवाले, सन्देहग्रस्त को
M.Farooq-M.Ahmed 50:25
26
जिसने अल्लाह के साथ किसी दूसरे को पूज्य-प्रभु ठहराया। तो डाल दो उसे कठोर यातना में।"
M.Farooq-M.Ahmed 50:26
27
उसका साथी बोला, "ऐ हमारे रब! मैंने उसे सरकश नहीं बनाया, बल्कि वह स्वयं ही परले दरजे की गुमराही में था।"
M.Farooq-M.Ahmed 50:27
28
कहा, "मेरे सामने मत झगड़ो। मैं तो तुम्हें पहले ही अपनी धमकी से सावधान कर चुका था। -
M.Farooq-M.Ahmed 50:28
29
मेरे यहाँ बात बदला नहीं करती और न मैं अपने बन्दों पर तनिक भी अत्याचार करता हूँ।
M.Farooq-M.Ahmed 50:29
30
जिस दिन हम जहन्नम से कहेंगे, "क्या तू भर गई?" और वह कहेगी, "क्या अभी और भी कुछ है?"
M.Farooq-M.Ahmed 50:30