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M.Farooq-M.Ahmed

M.Farooq-M.Ahmed
M.Farooq-M.Ahmed meali ile okumaya başla
Duhan 1 / 59
1
हा॰ मीम॰
M.Farooq-M.Ahmed 44:1
2
गवाह है स्पष्ट किताब
M.Farooq-M.Ahmed 44:2
3
निस्संदेह हमने उसे एक बरकत भरी रात में अवतरित किया है। - निश्चय ही हम सावधान करनेवाले है।-
M.Farooq-M.Ahmed 44:3
4
उस (रात) में तमाम तत्वदर्शिता युक्त मामलों का फ़ैसला किया जाता है,
M.Farooq-M.Ahmed 44:4
5
हमारे यहाँ से आदेश के रूप में। निस्संदेह रसूलों को भेजनेवाले हम ही है। -
M.Farooq-M.Ahmed 44:5
6
तुम्हारे रब की दयालुता के कारण। निस्संदेह वही सब कुछ सुननेवाला, जाननेवाला है
M.Farooq-M.Ahmed 44:6
7
आकाशों और धरती का रब और जो कुछ उन दोनों के बीच है उसका भी, यदि तुम विश्वास रखनेवाले हो (तो विश्वास करो कि किताब का अवतरण अल्लाह की दयालुता है)
M.Farooq-M.Ahmed 44:7
8
उसके अतिरिक्त कोई पूज्य-प्रभु नहीं; वही जीवित करता और मारता है; तुम्हारा रब और तुम्हारे अगले बाप-दादों का रब है
M.Farooq-M.Ahmed 44:8
9
बल्कि वे संदेह में पड़े रहे हैं
M.Farooq-M.Ahmed 44:9
10
अच्छा तो तुम उस दिन की प्रतीक्षा करो, जब आकाश प्रत्यक्ष धुँआ लाएगा।
M.Farooq-M.Ahmed 44:10
11
वह लोगों का ढाँक लेगा। यह है दुखद यातना!
M.Farooq-M.Ahmed 44:11
12
वे कहेंगे, "ऐ हमारे रब! हमपर से यातना हटा दे। हम ईमान लाते है।"
M.Farooq-M.Ahmed 44:12
13
अब उनके होश में आने का मौक़ा कहाँ बाक़ी रहा। उनका हाल तो यह है कि उनके पास साफ़-साफ़ बतानेवाला एक रसूल आ चुका है।
M.Farooq-M.Ahmed 44:13
14
फिर उन्होंने उसकी ओर से मुँह मोड़ लिया और कहने लगे, "यह तो एक सिखाया-पढ़ाया दीवाना है।"
M.Farooq-M.Ahmed 44:14
15
हम यातना थोड़ा हटा देते है तो तुम पुनः फिर जाते हो।
M.Farooq-M.Ahmed 44:15
16
याद रखो, जिस दिन हम बड़ी पकड़ पकड़ेंगे, तो निश्चय ही हम बदला लेकर रहेंगे
M.Farooq-M.Ahmed 44:16
17
उनसे पहले हम फ़िरऔन की क़ौम के लोगों को परीक्षा में डाल चुके हैं, जबकि उनके पास एक अत्यन्त सज्जन रसूल आया
M.Farooq-M.Ahmed 44:17
18
कि "तुम अल्लाह के बन्दों को मेरे हवाले कर दो। निश्चय ही मै तुम्हारे लिए एक विश्वसनीय रसूल हूँ
M.Farooq-M.Ahmed 44:18
19
और अल्लाह के मुक़ाबले में सरकशी न करो, मैं तुम्हारे लिए एक स्पष्ट प्रमाण लेकर आया हूँ
M.Farooq-M.Ahmed 44:19
20
और मैं इससे अपने रब और तुम्हारे रब की शरण ले चुका हूँ कि तुम मुझ पर पथराव करके मार डालो
M.Farooq-M.Ahmed 44:20
21
किन्तु यदि तुम मेरी बात नहीं मानते तो मुझसे अलग हो जाओ!"
M.Farooq-M.Ahmed 44:21
22
अन्ततः उसने अपने रब को पुकारा कि "ये अपराधी लोग है।"
M.Farooq-M.Ahmed 44:22
23
अच्छा तुम रातों रात मेरे बन्दों को लेकर चले जाओ। निश्चय ही तुम्हारा पीछा किया जाएगा
M.Farooq-M.Ahmed 44:23
24
और सागर को स्थिर छोड़ दो। वे तो एक सेना दल हैं, डूब जानेवाले।"
M.Farooq-M.Ahmed 44:24
25
वे छोड़ गये कितनॆ ही बाग़ और स्रोत
M.Farooq-M.Ahmed 44:25
26
और ख़ेतियां और उत्तम आवास-
M.Farooq-M.Ahmed 44:26
27
और सुख सामग्री जिनमें वे मज़े कर रहे थे।
M.Farooq-M.Ahmed 44:27
28
हम ऐसा ही मामला करते है, और उन चीज़ों का वारिस हमने दूसरे लोगों को बनाया
M.Farooq-M.Ahmed 44:28
29
फिर न तो आकाश और धरती ने उनपर विलाप किया और न उन्हें मुहलत ही मिली
M.Farooq-M.Ahmed 44:29
30
इस प्रकार हमने इसराईल की सन्तान को अपमानजनक यातना से
M.Farooq-M.Ahmed 44:30