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M.Farooq-M.Ahmed

M.Farooq-M.Ahmed
M.Farooq-M.Ahmed meali ile okumaya başla
Şuara 1 / 227
1
ता॰ सीन॰ मीम॰
M.Farooq-M.Ahmed 26:1
2
ये स्पष्ट किताब की आयतें है
M.Farooq-M.Ahmed 26:2
3
शायद इसपर कि वे ईमान नहीं लाते, तुम अपने प्राण ही खो बैठोगे
M.Farooq-M.Ahmed 26:3
4
यदि हम चाहें तो उनपर आकाश से एक निशानी उतार दें। फिर उनकी गर्दनें उसके आगे झुकी रह जाएँ
M.Farooq-M.Ahmed 26:4
5
उनके पास रहमान की ओर से जो नवीन अनुस्मृति भी आती है, वे उससे मुँह फेर ही लेते है
M.Farooq-M.Ahmed 26:5
6
अब जबकि वे झुठला चुके है, तो शीघ्र ही उन्हें उसकी हक़ीकत मालूम हो जाएगी, जिसका वे मज़ाक़ उड़ाते रहे है
M.Farooq-M.Ahmed 26:6
7
क्या उन्होंने धरती को नहीं देखा कि हमने उसमें कितने ही प्रकार की उमदा चीज़ें पैदा की है?
M.Farooq-M.Ahmed 26:7
8
निश्चय ही इसमें एक बड़ी निशानी है, इसपर भी उनमें से अधिकतर माननेवाले नहीं
M.Farooq-M.Ahmed 26:8
9
और निश्चय ही तुम्हारा रब ही है जो बड़ा प्रभुत्वशाली, अत्यन्त दयावान है
M.Farooq-M.Ahmed 26:9
10
और जबकि तुम्हारे रह ने मूसा को पुकारा कि "ज़ालिम लोगों के पास जा -
M.Farooq-M.Ahmed 26:10
11
फ़िरऔन की क़ौम के पास - क्या वे डर नहीं रखते?"
M.Farooq-M.Ahmed 26:11
12
उसने कहा, "ऐ मेरे रब! मुझे डर है कि वे मुझे झुठला देंगे,
M.Farooq-M.Ahmed 26:12
13
और मेरा सीना घुटता है और मेरी ज़बान नहीं चलती। इसलिए हारून की ओर भी संदेश भेज दे
M.Farooq-M.Ahmed 26:13
14
और मुझपर उनके यहाँ के एक गुनाह का बोझ भी है। इसलिए मैं डरता हूँ कि वे मुझे मार डालेंगे।"
M.Farooq-M.Ahmed 26:14
15
कहा, "कदापि नहीं, तुम दोनों हमारी निशानियाँ लेकर जाओ। हम तुम्हारे साथ है, सुनने को मौजूद है
M.Farooq-M.Ahmed 26:15
16
अतः तुम दोनो फ़िरऔन को पास जाओ और कहो कि हम सारे संसार के रब के भेजे हुए है
M.Farooq-M.Ahmed 26:16
17
कि तू इसराईल की सन्तान को हमारे साथ जाने दे।"
M.Farooq-M.Ahmed 26:17
18
(फ़िरऔन ने) कहा, "क्या हमने तुझे जबकि तू बच्चा था, अपने यहाँ पाला नहीं था? और तू अपनी अवस्था के कई वर्षों तक हमारे साथ रहा,
M.Farooq-M.Ahmed 26:18
19
और तूने अपना वह काम किया, जो किया। तू बड़ा ही कृतघ्न है।"
M.Farooq-M.Ahmed 26:19
20
कहा, ऐसा तो मुझसे उस समय हुआ जबकि मैं चूक गया था
M.Farooq-M.Ahmed 26:20
21
फिर जब मुझे तुम्हारा भय हुआ तो मैं तुम्हारे यहाँ से भाग गया। फिर मेरे रब ने मुझे निर्णय-शक्ति प्रदान की और मुझे रसूलों में सम्मिलित किया
M.Farooq-M.Ahmed 26:21
22
यही वह उदार अनुग्रह है जिसका रहमान तू मुझपर जताता है कि तूने इसराईल की सन्तान को ग़ुलाम बना रखा है।"
M.Farooq-M.Ahmed 26:22
23
फ़िरऔन ने कहा, "और यह सारे संसार का रब क्या होता है?"
M.Farooq-M.Ahmed 26:23
24
उसने कहा, "आकाशों और धरती का रब और जो कुछ इन दोनों का मध्य है उसका भी, यदि तुम्हें यकीन हो।"
M.Farooq-M.Ahmed 26:24
25
उसने अपने आस-पासवालों से कहा, "क्या तुम सुनते नहीं हो?"
M.Farooq-M.Ahmed 26:25
26
कहा, "तुम्हारा रब और तुम्हारे अगले बाप-दादा का रब।"
M.Farooq-M.Ahmed 26:26
27
बोला, "निश्चय ही तुम्हारा यह रसूल, जो तुम्हारी ओर भेजा गया है, बिलकुल ही पागल है।"
M.Farooq-M.Ahmed 26:27
28
उसने कहा, "पूर्व और पश्चिम का रब और जो कुछ उनके बीच है उसका भी, यदि तुम कुछ बुद्धि रखते हो।"
M.Farooq-M.Ahmed 26:28
29
बोला, "यदि तूने मेरे सिवा किसी और को पूज्य एवं प्रभु बनाया, तो मैं तुझे बन्दी बनाकर रहूँगा।"
M.Farooq-M.Ahmed 26:29
30
उसने कहा, "क्या यदि मैं तेरे पास एक स्पष्ट चीज़ ले आऊँ तब भी?"
M.Farooq-M.Ahmed 26:30