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M.Farooq-M.Ahmed

M.Farooq-M.Ahmed
M.Farooq-M.Ahmed meali ile okumaya başla
Müminun 1 / 118
1
सफल हो गए ईमानवाले,
M.Farooq-M.Ahmed 23:1
2
जो अपनी नमाज़ों में विनम्रता अपनाते है;
M.Farooq-M.Ahmed 23:2
3
और जो व्यर्थ बातों से पहलू बचाते है;
M.Farooq-M.Ahmed 23:3
4
और जो ज़कात अदा करते है;
M.Farooq-M.Ahmed 23:4
5
और जो अपने गुप्तांगों की रक्षा करते है-
M.Farooq-M.Ahmed 23:5
6
सिवाय इस सूरत के कि अपनी पत्नि यों या लौंडियों के पास जाएँ कि इसपर वे निन्दनीय नहीं है
M.Farooq-M.Ahmed 23:6
7
परन्तु जो कोई इसके अतिरिक्त कुछ और चाहे तो ऐसे ही लोग सीमा उल्लंघन करनेवाले है।-
M.Farooq-M.Ahmed 23:7
8
और जो अपनी अमानतों और अपनी प्रतिज्ञा का ध्यान रखते है;
M.Farooq-M.Ahmed 23:8
9
और जो अपनी नमाज़ों की रक्षा करते हैं;
M.Farooq-M.Ahmed 23:9
10
वही वारिस होने वाले है
M.Farooq-M.Ahmed 23:10
11
जो फ़िरदौस की विरासत पाएँगे। वे उसमें सदैव रहेंगे
M.Farooq-M.Ahmed 23:11
12
हमने मनुष्य को मिट्टी के सत से बनाया
M.Farooq-M.Ahmed 23:12
13
फिर हमने उसे एक सुरक्षित ठहरने की जगह टपकी हुई बूँद बनाकर रखा
M.Farooq-M.Ahmed 23:13
14
फिर हमने उस बूँद को लोथड़े का रूप दिया; फिर हमने उस लोथड़े को बोटी का रूप दिया; फिर हमने उन हड्डियों पर मांस चढाया; फिर हमने उसे एक दूसरा ही सर्जन रूप देकर खड़ा किया। अतः बहुत ही बरकतवाला है अल्लाह, सबसे उत्तम स्रष्टा!
M.Farooq-M.Ahmed 23:14
15
फिर तुम अवश्य मरनेवाले हो
M.Farooq-M.Ahmed 23:15
16
फिर क़ियामत के दिन तुम निश्चय ही उठाए जाओगे
M.Farooq-M.Ahmed 23:16
17
और हमने तुम्हारे ऊपर सात रास्ते बनाए है। और हम सृष्टि-कार्य से ग़ाफ़िल नहीं
M.Farooq-M.Ahmed 23:17
18
और हमने आकाश से एक अंदाज़े के साथ पानी उतारा। फिर हमने उसे धरती में ठहरा दिया, और उसे विलुप्त करने की सामर्थ्य भी हमें प्राप्त है
M.Farooq-M.Ahmed 23:18
19
फिर हमने उसके द्वारा तुम्हारे लिए खजूरो और अंगूरों के बाग़ पैदा किए। तुम्हारे लिए उनमें बहुत-से फल है (जिनमें तुम्हारे लिए कितने ही लाभ है) और उनमें से तुम खाते हो
M.Farooq-M.Ahmed 23:19
20
और वह वृक्ष भी जो सैना पर्वत से निकलता है, जो तेल और खानेवालों के लिए सालन लिए हुए उगता है
M.Farooq-M.Ahmed 23:20
21
और निश्चय ही तुम्हारे लिए चौपायों में भी एक शिक्षा है। उनके पेटों में जो कुछ है उसमें से हम तुम्हें पिलाते है। औऱ तुम्हारे लिए उनमें बहुत-से फ़ायदे है और उन्हें तुम खाते भी हो
M.Farooq-M.Ahmed 23:21
22
और उनपर और नौकाओं पर तुम सवार होते हो
M.Farooq-M.Ahmed 23:22
23
हमने नूह को उसकी क़ौम की ओर भेजा तो उसने कहा, "ऐ मेरी क़ौम के लोगो! अल्लाह की बन्दगी करो। उसके सिवा तुम्हारा और कोई इष्ट-पूज्य नहीं है तो क्या तुम डर नहीं रखते?"
M.Farooq-M.Ahmed 23:23
24
इसपर उनकी क़ौम के सरदार, जिन्होंने इनकार किया था, कहने लगे, "यह तो बस तुम्हीं जैसा एक मनुष्य है। चाहता है कि तुमपर श्रेष्ठता प्राप्त करे।""अल्लाह यदि चाहता तो फ़रिश्ते उतार देता। यह बात तो हमने अपने अगले बाप-दादा के समयों से सुनी ही नहीं
M.Farooq-M.Ahmed 23:24
25
यह तो बस एक उन्मादग्रस्त व्यक्ति है। अतः एक समय तक इसकी प्रतीक्षा कर लो।"
M.Farooq-M.Ahmed 23:25
26
उसने कहा, "ऐ मेरे रब! इन्होंने मुझे जो झुठलाया है, इसपर तू मेरी सहायता कर।"
M.Farooq-M.Ahmed 23:26
27
तब हमने उसकी ओर प्रकाशना की कि "हमारी आँखों के सामने और हमारी प्रकाशना के अनुसार नौका बना और फिर जब हमारा आदेश आ जाए और तूफ़ान उमड़ पड़े तो प्रत्येक प्रजाति में से एक-एक जोड़ा उसमें रख ले और अपने लोगों को भी, सिवाय उनके जिनके विरुद्ध पहले फ़ैसला हो चुका है। और अत्याचारियों के विषय में मुझसे बात न करना। वे तो डूबकर रहेंगे
M.Farooq-M.Ahmed 23:27
28
फिर जब तू नौका पर सवार हो जाए और तेरे साथी भी तो कह, प्रशंसा है अल्लाह की, जिसने हमें ज़ालिम लोगों से छुटकारा दिया
M.Farooq-M.Ahmed 23:28
29
और कह, ऐ मेरे रब! मुझे बरकतवाली जगह उतार। और तू सबसे अच्छा मेज़बान है।"
M.Farooq-M.Ahmed 23:29
30
निस्संदेह इसमें कितनी ही निशानियाँ हैं और परीक्षा तो हम करते ही है
M.Farooq-M.Ahmed 23:30