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M.Farooq-M.Ahmed

M.Farooq-M.Ahmed
M.Farooq-M.Ahmed meali ile okumaya başla
Ta Ha 1 / 135
1
ता॰ हा॰।
M.Farooq-M.Ahmed 20:1
2
हमने तुमपर यह क़ुरआन इसलिए नहीं उतारा कि तुम मशक़्क़त में पड़ जाओ
M.Farooq-M.Ahmed 20:2
3
यह तो बस एक अनुस्मृति है, उसके लिए जो डरे,
M.Farooq-M.Ahmed 20:3
4
भली-भाँति अवतरित हुआ है उस सत्ता की ओर से, जिसने पैदा किया है धरती और उच्च आकाशों को
M.Farooq-M.Ahmed 20:4
5
वह रहमान है, जो राजासन पर विराजमान हुआ
M.Farooq-M.Ahmed 20:5
6
उसी का है जो कुछ आकाशों में है और जो कुछ धरती में है और जो कुछ इन दोनों के मध्य है और जो कुछ आर्द्र मिट्टी के नीचे है
M.Farooq-M.Ahmed 20:6
7
तुम चाहे बात पुकार कर कहो (या चुपके से), वह तो छिपी हुई और अत्यन्त गुप्त बात को भी जानता है
M.Farooq-M.Ahmed 20:7
8
अल्लाह, कि उसके सिवा कोई पूज्य-प्रभू नहीं। उसके नाम बहुत ही अच्छे हैं।
M.Farooq-M.Ahmed 20:8
9
क्या तुम्हें मूसा की भी ख़बर पहुँची?
M.Farooq-M.Ahmed 20:9
10
जबकि उसने एक आग देखी तो उसने अपने घरवालों से कहा, "ठहरो! मैंने एक आग देखी है। शायद कि तुम्हारे लिए उसमें से कोई अंगारा ले आऊँ या उस आग पर मैं मार्ग का पता पा लूँ।"
M.Farooq-M.Ahmed 20:10
11
फिर जब वह वहाँ पहुँचा तो पुकारा गया, "ऐ मूसा!
M.Farooq-M.Ahmed 20:11
12
मैं ही तेरा रब हूँ। अपने जूते उतार दे। तू पवित्र घाटी 'तुवा' में है
M.Farooq-M.Ahmed 20:12
13
मैंने तुझे चुन लिया है। अतः सुन, जो कुछ प्रकाशना की जाती है
M.Farooq-M.Ahmed 20:13
14
निस्संदेह मैं ही अल्लाह हूँ। मेरे सिवा कोई पूज्य-प्रभु नहीं। अतः तू मेरी बन्दगी कर और मेरी याद के लिए नमाज़ क़ायम कर
M.Farooq-M.Ahmed 20:14
15
निश्चय ही वह (क़ियामत की) घड़ी आनेवाली है - शीघ्र ही उसे लाऊँगा, उसे छिपाए रखता हूँ - ताकि प्रत्येक व्यक्ति जो प्रयास वह करता है, उसका बदला पाए
M.Farooq-M.Ahmed 20:15
16
अतः जो कोई उसपर ईमान नहीं लाता और अपनी वासना के पीछे पड़ा है, वह तुझे उससे रोक न दे, अन्यथा तू विनष्ट हो जाएगा
M.Farooq-M.Ahmed 20:16
17
और ऐ मूसा! यह तेरे दाहिने हाथ में क्या है?"
M.Farooq-M.Ahmed 20:17
18
उसने कहा, "यह मेरी लाठी है। मैं इसपर टेक लगाता हूँ और इससे अपनी बकरियों के लिए पत्ते झाड़ता हूँ और इससे मेरी दूसरी ज़रूरतें भी पूरी होती है।"
M.Farooq-M.Ahmed 20:18
19
कहा, "डाल दे उसे, ऐ मूसा!"
M.Farooq-M.Ahmed 20:19
20
अतः उसने डाल दिया। सहसा क्या देखते है कि वह एक साँप है, जो दौड़ रहा है
M.Farooq-M.Ahmed 20:20
21
कहा, "इसे पकड़ ले और डर मत। हम इसे इसकी पहली हालत पर लौटा देंगे
M.Farooq-M.Ahmed 20:21
22
और अपने हाथ अपने बाज़ू की ओर समेट ले। वह बिना किसी ऐब के रौशन दूसरी निशानी के रूप में निकलेगा
M.Farooq-M.Ahmed 20:22
23
इसलिए कि हम तुझे अपनी बड़ी निशानियाँ दिखाएँ
M.Farooq-M.Ahmed 20:23
24
तू फ़िरऔन के पास जा। वह बहुत सरकश हो गया है।"
M.Farooq-M.Ahmed 20:24
25
उसने निवेदन किया, "मेरे रब! मेरा सीना मेरे लिए खोल दे
M.Farooq-M.Ahmed 20:25
26
और मेरे काम को मेरे लिए आसान कर दे
M.Farooq-M.Ahmed 20:26
27
और मेरी ज़बान की गिरह खोल दे।
M.Farooq-M.Ahmed 20:27
28
कि वे मेरी बात समझ सकें
M.Farooq-M.Ahmed 20:28
29
और मेरे लिए अपने घरवालों में से एक सहायक नियुक्त कर दें,
M.Farooq-M.Ahmed 20:29
30
हारून को, जो मेरा भाई है
M.Farooq-M.Ahmed 20:30