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M.Farooq-M.Ahmed

M.Farooq-M.Ahmed
M.Farooq-M.Ahmed meali ile okumaya başla
Hicr 1 / 99
1
अलिफ़॰ लाम॰ रा॰। यह किताब अर्थात स्पष्ट क़ुरआन की आयतें हैं
M.Farooq-M.Ahmed 15:1
2
ऐसे समय आएँगे जब इनकार करनेवाले कामना करेंगे कि क्या ही अच्छा होता कि हम मुस्लिम (आज्ञाकारी) होते!
M.Farooq-M.Ahmed 15:2
3
छोड़ो उन्हें खाएँ और मज़े उड़ाएँ और (लम्बी) आशा उन्हें भुलावे में डाले रखे। उन्हें जल्द ही मालूम हो जाएगा!
M.Farooq-M.Ahmed 15:3
4
हमने जिस बस्ती को भी विनष्ट किया है, उसके लिए अनिवार्यतः एक निश्चित फ़ैसला रहा है!
M.Farooq-M.Ahmed 15:4
5
किसी समुदाय के लोग न अपने निश्चि‍त समय से आगे बढ़ सकते है और न वे पीछे रह सकते है
M.Farooq-M.Ahmed 15:5
6
वे कहते है, "ऐ व्यक्ति, जिसपर अनुस्मरण अवतरित हुआ, तुम निश्चय ही दीवाने हो!
M.Farooq-M.Ahmed 15:6
7
यदि तुम सच्चे हो तो हमारे समक्ष फ़रिश्तों को क्यों नहीं ले आते?"
M.Farooq-M.Ahmed 15:7
8
फ़रिश्तों को हम केवल सत्य के प्रयोजन हेतु उतारते है और उस समय लोगों को मुहलत नहीं मिलेगी
M.Farooq-M.Ahmed 15:8
9
यह अनुसरण निश्चय ही हमने अवतरित किया है और हम स्वयं इसके रक्षक हैं
M.Farooq-M.Ahmed 15:9
10
तुमसे पहले कितने ही विगत गिरोंहों में हम रसूल भेज चुके है
M.Farooq-M.Ahmed 15:10
11
कोई भी रसूल उनके पास ऐसा नहीं आया, जिसका उन्होंने उपहास न किया हो
M.Farooq-M.Ahmed 15:11
12
इसी तरह हम अपराधियों के दिलों में इसे उतारते है
M.Farooq-M.Ahmed 15:12
13
वे इसे मानेंगे नहीं। पहले के लोगों की मिसालें गुज़र चुकी हैं
M.Farooq-M.Ahmed 15:13
14
यदि हम उनपर आकाश से कोई द्वार खोल दें और वे दिन-दहाड़े उसमें चढ़ने भी लगें,
M.Farooq-M.Ahmed 15:14
15
फिर भी वे यही कहेंगे, "हमारी आँखें मदमाती हैं, बल्कि हम लोगों पर जादू कर दिया गया है!"
M.Farooq-M.Ahmed 15:15
16
हमने आकाश में बुर्ज (तारा-समूह) बनाए और हमने उसे देखनेवालों के लिए सुसज्जित भी किया
M.Farooq-M.Ahmed 15:16
17
और हर फिटकारे हुए शैतान से उसे सुरक्षित रखा -
M.Farooq-M.Ahmed 15:17
18
यह और बात है कि किसी ने चोरी-छिपे कुछ सुनगुन ले लिया तो एक प्रत्यक्ष अग्निशिखा ने भी झपटकर उसका पीछा किया -
M.Farooq-M.Ahmed 15:18
19
और हमने धरती को फैलाया और उसमें अटल पहाड़ डाल दिए और उसमें हर चीज़ नपे-तुले अन्दाज़ में उगाई
M.Farooq-M.Ahmed 15:19
20
और उसमें तुम्हारे गुज़र-बसर के सामान निर्मित किए, और उनको भी जिनको रोज़ी देनेवाले तुम नहीं हो
M.Farooq-M.Ahmed 15:20
21
कोई भी चीज़ तो ऐसी नहीं है जिसके भंडार हमारे पास न हों, फिर भी हम उसे एक ज्ञात (निश्चिंत) मात्रा के साथ उतारते है
M.Farooq-M.Ahmed 15:21
22
हम ही वर्षा लानेवाली हवाओं को भेजते है। फिर आकाश से पानी बरसाते है और उससे तुम्हें सिंचित करते है। उसके ख़जानादार तुम नहीं हो
M.Farooq-M.Ahmed 15:22
23
हम ही जीवन और मृत्यु देते है और हम ही उत्तराधिकारी रह जाते है
M.Farooq-M.Ahmed 15:23
24
हम तुम्हारे पहले के लोगों को भी जानते है और बाद के आनेवालों को भी हम जानते है
M.Farooq-M.Ahmed 15:24
25
तुम्हारा रब ही है, जो उन्हें इकट्ठा करेगा। निस्संदेह वह तत्वदर्शी, सर्वज्ञ है
M.Farooq-M.Ahmed 15:25
26
हमने मनुष्य को सड़े हुए गारे की खनखनाती हुई मिट्टी से बनाया है,
M.Farooq-M.Ahmed 15:26
27
और उससे पहले हम जिन्नों को लू रूपी अग्नि से पैदा कर चुके थे
M.Farooq-M.Ahmed 15:27
28
याद करो जब तुम्हारे रब ने फ़रिश्तों से कहा, "मैं सड़े हुए गारे की खनखनाती हुई मिट्टी से एक मनुष्य पैदा करनेवाला हूँ
M.Farooq-M.Ahmed 15:28
29
तो जब मैं उसे पूरा बना चुकूँ और उसमें अपनी रूह फूँक दूँ तो तुम उसके आगे सजदे में गिर जाना!"
M.Farooq-M.Ahmed 15:29
30
अतएव सब के सब फ़रिश्तो ने सजदा किया,
M.Farooq-M.Ahmed 15:30