1
क्या तुमने उसे देखा जो दीन को झुठलाता है?
2
वही तो है जो अनाथ को धक्के देता है,
3
और मुहताज के खिलाने पर नहीं उकसाता
4
अतः तबाही है उन नमाज़ियों के लिए,
5
जो अपनी नमाज़ से ग़ाफिल (असावधान) हैं,
6
जो दिखावे के लिए कार्य करते हैं,
7
और साधारण बरतने की चीज़ भी किसी को नहीं देते