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M.Farooq-M.Ahmed

M.Farooq-M.Ahmed
M.Farooq-M.Ahmed meali ile okumaya başla
Tekasür 1 / 8
1
तुम्हें एक-दूसरे के मुक़ाबले में बहुतायत के प्रदर्शन और घमंड ने ग़फ़़लत में डाल रखा है,
M.Farooq-M.Ahmed 102:1
2
यहाँ तक कि तुम क़ब्रिस्तानों में पहुँच गए
M.Farooq-M.Ahmed 102:2
3
कुछ नहीं, तुम शीघ्र ही जान लोगे
M.Farooq-M.Ahmed 102:3
4
फिर, कुछ नहीं, तुम्हें शीघ्र ही मालूम हो जाएगा -
M.Farooq-M.Ahmed 102:4
5
कुछ नहीं, अगर तुम विश्वसनीय ज्ञान के रूप में जान लो! (तो तुम धन-दौलत के पुजारी न बनो) -
M.Farooq-M.Ahmed 102:5
6
अवश्य ही तुम भड़कती आग से दो-चार होगे
M.Farooq-M.Ahmed 102:6
7
फिर सुनो, उसे अवश्य देखोगे इस दशा में कि वह यथावत विश्वास होगा
M.Farooq-M.Ahmed 102:7
8
फिर निश्चय ही उस दिन तुमसे नेमतों के बारे में पूछा जाएगा
M.Farooq-M.Ahmed 102:8
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