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M.Farooq-M.Ahmed

M.Farooq-M.Ahmed
M.Farooq-M.Ahmed meali ile okumaya başla
Adiyat 1 / 11
1
साक्षी है जो हाँफते-फुँकार मारते हुए दौड़ते है,
M.Farooq-M.Ahmed 100:1
2
फिर ठोकरों से चिनगारियाँ निकालते है,
M.Farooq-M.Ahmed 100:2
3
फिर सुबह सवेरे धावा मारते होते है,
M.Farooq-M.Ahmed 100:3
4
उसमें उठाया उन्होंने गर्द-गुबार
M.Farooq-M.Ahmed 100:4
5
और इसी हाल में वे दल में जा घुसे
M.Farooq-M.Ahmed 100:5
6
निस्संदेह मनुष्य अपने रब का बड़ा अकृतज्ञ हैं,
M.Farooq-M.Ahmed 100:6
7
और निश्चय ही वह स्वयं इसपर गवाह है!
M.Farooq-M.Ahmed 100:7
8
और निश्चय ही वह धन के मोह में बड़ा दृढ़ है
M.Farooq-M.Ahmed 100:8
9
तो क्या वह जानता नहीं जब उगवला लिया जाएगा तो क़ब्रों में है
M.Farooq-M.Ahmed 100:9
10
और स्पष्ट अनावृत्त कर दिया जाएगा तो कुछ सीनों में है
M.Farooq-M.Ahmed 100:10
11
निस्संदेह उनका रब उस दिन उनकी पूरी ख़बर रखता होगा
M.Farooq-M.Ahmed 100:11
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